पालघर: पालघर जिले में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचाई है। कई निचले इलाकों और दूर-दराज के गांवों में पानी भर जाने से बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो गई है, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो चुका है। बारिश और बाढ़ के चलते जिले की पालघर, तलासरी और डहाणू तहसील सबसे अधिक प्रभावित हुई हैं।
डहाणू तहसील में दर्दनाक हादसे, 3 लोगों ने गंवाई जान
भारी बारिश और उफान पर आई नदियों के कारण डहाणू तहसील में तीन लोगों की मौत की दुखद खबर है।
- आगवण गांव: 39 वर्षीय जगदीश वासन मच्छी बाढ़ के तेज बहाव में बह गए, जिससे उनकी मौत हो गई।
- आंबेवाड़ी (लाखतपाड़ा): 30 वर्षीय रुपेश पांडुरंग धाडगा खेत की ओर जाते समय पैर फिसलने से गहरे पानी में डूब गए।
- तीसरी मौत: प्रशासन द्वारा तीसरे मृतक की पहचान की प्रक्रिया जारी है।
284 परिवारों को सुरक्षित स्थान पर भेजा, राहत शिविर स्थापित
प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तुरंत बड़े पैमाने पर रेस्क्यू और राहत कार्य शुरू कर दिया है:
- किराट, चहाडे, नागझरी, कोकनेर, गुंदले, चिंचारा, बोर्डी, चिंचणी, उधवा और साये सहित दर्जनों गांवों से अब तक 284 परिवारों के 1,155 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।
- इन प्रभावितों को अस्थायी राहत शिविरों और रिश्तेदारों के घर ठहराया गया है। प्रशासन द्वारा भोजन, शुद्ध पेयजल, दवाइयां और अन्य आवश्यक सामग्रियां उपलब्ध कराई जा रही हैं।
- जिन इलाकों से बाढ़ का पानी उतर चुका है, वहां राजस्व विभाग की टीमों ने नुकसान का पंचनामा (सर्वे) शुरू कर दिया है, ताकि सरकारी नियमों के तहत पात्र लोगों को जल्द मुआवजा दिया जा सके।
इन्फ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान: सड़कों और पुलों की मरम्मत पर 13.55 करोड़ का अनुमान
बारिश और भूस्खलन के कारण जिले की अवसंरचना को भारी क्षति पहुंची है:
- 29.45 किलोमीटर लंबी सड़कें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुई हैं।
- 24 कॉजवे/क्रॉस ड्रेनेज और 6 मुख्य पुल प्रभावित हुए हैं।
- प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, क्षतिग्रस्त इन्फ्रास्ट्रक्चर की मरम्मत में लगभग 13.55 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है।
जगह-जगह पेड़ गिरने, सड़क धंसने और भूस्खलन के कारण यातायात ठप हो गया था। हालांकि, जिला प्रशासन, PWD, NHAI और पुलिस बल की संयुक्त टीमों ने तत्परता दिखाते हुए अधिकांश प्रमुख मार्गों पर यातायात बहाल कर दिया है।
जिला प्रशासन की अपील: जिला प्रशासन ने जानकारी दी है कि सभी संबंधित विभाग 24 घंटे (24×7) अलर्ट पर हैं। स्थिति पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है और राहत कार्य युद्धस्तर पर जारी हैं।







