पालघर: दहाणू क्षेत्र में जलभराव (वॉटरलॉगिंग) की समस्या के लिए मैंग्रोव की अवैध कटाई, अतिक्रमण और अनधिकृत निर्माणों को ज़िम्मेदार ठहराए जाने के बाद पालघर जिला कांग्रेस अध्यक्ष कैप्टन सत्यम ठाकूर ने राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने पालकमंत्री व वनमंत्री गणेश नाईक के रुख पर सवाल उठाते हुए मैंग्रोव संरक्षण नीति को लेकर सरकार पर दोहरे मापदंड अपनाने का सीधा आरोप लगाया है।
सरकार के दोहरे मापदंडों पर खड़े किए सवाल
कैप्टन सत्यम ठाकूर ने कहा कि पालकमंत्री द्वारा दहाणू में मैंग्रोव क्षेत्रों के सर्वे, अतिक्रमण हटाने और पुनर्रोपण (रीप्लांटेशन) के आदेश दिए गए हैं, जो कि एक सराहनीय कदम है। लेकिन सवाल यह उठता है कि पर्यावरण संरक्षण के यही कड़े नियम और नीतियां बहुचर्चित बढ़वण बंदरगाह (Vadhavan Port) परियोजना पर लागू क्यों नहीं होते?
1,583 मैंग्रोव काटने की अनुमति और विरोध प्रदर्शन
ठाकूर ने गंभीर दावा करते हुए कहा कि एक तरफ आम नागरिकों पर कार्रवाई हो रही है, वहीं दूसरी तरफ वन विभाग ने अदालत से अनुमति लेकर वरोर गांव में बढ़वण पोर्ट प्रोजेक्ट के लिए 1,583 मैंग्रोव पेड़ों को काटने की मंज़ूरी दी है।
उन्होंने आगे कहा कि जब स्थानीय मछुआरे, आदिवासी समाज, महिलाएं और नागरिक पर्यावरण एवं अपने अधिकारों की रक्षा के लिए शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे थे, तो उन पर भारी पुलिस बल तैनात कर प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।
‘प्रकृति भेदभाव नहीं करती, तो शासन क्यों करे?’
अपनी मांगों को स्पष्ट करते हुए कैप्टन सत्यम ठाकूर ने सरकार से मांग की है कि:
- बढ़वण बंदरगाह के लिए मैंग्रोव की कटाई पर तुरंत रोक लगाई जाए।
- जो मैंग्रोव अब तक काटे जा चुके हैं, उनका अविलंब पुनर्रोपण कराया जाए।
- पर्यावरण संरक्षण से जुड़े सभी कड़े नियम आम जनता और बड़ी परियोजनाओं, दोनों पर समान रूप से लागू हों।
उन्होंने कड़े शब्दों में कहा, “प्रकृति किसी के साथ भेदभाव नहीं करती, इसलिए पर्यावरण की रक्षा को लेकर शासन को भी दोहरा रवैया नहीं अपनाना चाहिए।”











