मुंबई बैंक की 52वीं वार्षिक आम सभा में वैभव सहकारी पतसंस्था के अध्यक्ष हरिश्चंद्र जंगम ने उठाया मुद्दा, अध्यक्ष प्रवीण दरेकर ने दिया सकारात्मक आश्वासन
मुंबई: मुंबई की ब वर्ग और क वर्ग ऑडिट वाली पतसंस्थाओं के सामने आ रही आर्थिक चुनौतियों को देखते हुए उनके लिए विशेष कर्ज मंजूरी और कर्ज उठाने की नीति में शर्तों को शिथिल करने की मांग उठाई गई है। यह मांग वैभव सहकारी पतसंस्था के अध्यक्ष हरिश्चंद्र जंगम ने मुंबई बैंक की 52वीं वार्षिक आम सभा के दौरान रखी।
सभा में मुंबई बैंक के अध्यक्ष प्रवीण भाऊ दरेकर, पतसंस्थाओं के मार्गदर्शक शिवाजीराव नलावडे सहित बैंक के निदेशक मंडल के सदस्य उपस्थित रहे।

आर्थिक दबाव से जूझ रही पतसंस्थाएं
सभा को संबोधित करते हुए हरिश्चंद्र जंगम ने कहा कि मुंबई की कई ब वर्ग और क वर्ग पतसंस्थाएं वर्तमान में आर्थिक कठिनाइयों से गुजर रही हैं। बड़ी पतसंस्थाओं और सहकारी बैंकों के साथ बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण इन संस्थाओं पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि ऐसी पतसंस्थाओं को विशेष मामला मानकर सुलभ तरीके से कर्ज उपलब्ध कराया जाना चाहिए, ताकि वे अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकें और अपने सदस्यों को बेहतर सेवाएं दे सकें।
वैभव सहकारी पतसंस्था का उदाहरण दिया
हरिश्चंद्र जंगम ने अपनी संस्था का उदाहरण देते हुए बताया कि वैभव सहकारी पतसंस्था ने 40 वर्ष का कार्यकाल पूरा किया है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2009 में संस्था ने मुंबई बैंक में करीब 40 लाख रुपये जमा किए थे। उस समय संस्था की प्रगति के लिए दोबारा कर्ज उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया था।
हालांकि, जंगम के अनुसार कर्ज नीति की सीमाओं के चलते संस्था अपेक्षित मात्रा में कर्ज नहीं उठा सकी।
कर्ज सीमा से नए कर्ज वितरण पर असर
हरिश्चंद्र जंगम ने कहा कि कर्ज वितरण पर सीमा होने के कारण मेच्योरिटी पूरी करने वाले जमाकर्ताओं की जमा राशि लौटाने में उपलब्ध निधि का बड़ा हिस्सा इस्तेमाल हो जाता है। इससे नए कर्ज बांटने की क्षमता प्रभावित होती है।
उनके मुताबिक, नए कर्ज वितरण में कमी आने से पतसंस्थाओं की आय पर भी असर पड़ता है और आर्थिक कठिनाइयां बढ़ती हैं। उन्होंने कहा कि जब अच्छे कर्जदारों को समय पर कर्ज नहीं मिल पाता तो वे बड़ी पतसंस्थाओं या सहकारी बैंकों का रुख कर लेते हैं।
मुंबई बैंक से राहत देने की अपील
हरिश्चंद्र जंगम ने मांग की कि ब वर्ग और क वर्ग ऑडिट वाली पतसंस्थाओं की वास्तविक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उनके लिए विशेष कर्ज मंजूरी की व्यवस्था की जाए और कर्ज उठाने की नीति में जरूरी शर्तों को सरल बनाया जाए।
उन्होंने कहा कि पतसंस्थाओं की शीर्ष बैंक के रूप में मुंबई बैंक को इन संस्थाओं की आर्थिक उन्नति के लिए आवश्यक राहत देने की दिशा में पहल करनी चाहिए।
प्रवीण दरेकर ने दिया सकारात्मक आश्वासन
मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए मुंबई बैंक के अध्यक्ष प्रवीण भाऊ दरेकर ने सकारात्मक रुख अपनाया। उन्होंने आश्वासन दिया कि ऐसी सभी पतसंस्थाओं को जल्द से जल्द एक साथ बुलाकर उनकी समस्याओं और कठिनाइयों पर विचार किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि कर्ज मंजूरी के संबंध में परिस्थितियों को समझने के बाद उचित निर्णय लेने की दिशा में कदम उठाया जाएगा।












