वाडा, विक्रमगढ़, डहाणू, वसई और पालघर के किसानों को राहत देने की अपील; पूरे जिले की स्थिति का तालुकावार पुनर्सर्वेक्षण कराने की मांग
पालघर |
पालघर जिले के शेष पांच तालुकों को भी सूखाग्रस्त घोषित कर पूरे जिले को सूखाग्रस्त क्षेत्र की सूची में शामिल करने की मांग सांसद डॉ. हेमंत विष्णु सवारा ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से की है। इस संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर प्रभावित किसानों को आर्थिक सहायता, आवश्यक रियायतें और सरकारी योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने की अपील की है।
राज्य सरकार ने पालघर जिले के जव्हार, मोखाडा और तलासरी तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित किया है। इसके लिए सांसद डॉ. सवारा ने सरकार का आभार जताया। हालांकि, उनका कहना है कि वाडा, विक्रमगढ़, डहाणू, वसई और पालघर तालुकों के किसान भी अनियमित बारिश के कारण कृषि संकट का सामना कर रहे हैं। ऐसे में इन क्षेत्रों को भी सूखाग्रस्त सूची में शामिल किया जाना चाहिए।
अनियमित बारिश से धान की फसल पर असर की आशंका
सांसद डॉ. सवारा के अनुसार, इस वर्ष खरीफ सीजन में बारिश के असमान वितरण का धान की खेती पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। जून में बारिश देर से शुरू होने के कारण बुवाई में देरी हुई। जुलाई में कुछ क्षेत्रों में अतिवृष्टि हुई, जबकि अगस्त और सितंबर में कई इलाकों में बारिश का लंबा अंतराल रहा।
इस अनियमित बारिश के कारण धान की फसल की वृद्धि और दाने भरने की प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका है। इसके अलावा, सितंबर के मध्य से तापमान बढ़ने के कारण जमीन में नमी कम हुई, जिससे फसलों पर पानी का दबाव बढ़ गया।
सांसद के मुताबिक, इन परिस्थितियों का असर कृषि उत्पादन और किसानों की आय पर पड़ सकता है। इसी को देखते हुए प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति का दोबारा आकलन करना जरूरी है।
तालुकावार पुनर्सर्वेक्षण कराने की मांग
डॉ. हेमंत सवारा ने मांग की है कि सूखे की स्थिति का आकलन केवल कुल बारिश के आंकड़ों के आधार पर न किया जाए। इसके बजाय बारिश के वितरण, फसलों की मौजूदा स्थिति, मिट्टी में नमी और कृषि उत्पादन पर पड़े प्रभाव का तालुकावार पुनर्सर्वेक्षण कराया जाए।
उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से पूरे पालघर जिले की स्थिति का व्यापक आकलन कराने की अपील की है। साथ ही, निर्धारित सरकारी मानकों के अनुसार सभी प्रभावित किसानों को आर्थिक सहायता, जरूरी रियायतें और अन्य सरकारी लाभ उपलब्ध कराने की मांग की है।
किसानों को राहत मिलने की उम्मीद
सांसद के इस ज्ञापन के बाद अब प्रभावित क्षेत्रों के किसानों की नजर राज्य सरकार के अगले कदम पर रहेगी। यदि पुनर्सर्वेक्षण में संबंधित क्षेत्रों में सूखे जैसी स्थिति की पुष्टि होती है और सरकारी मानक पूरे होते हैं, तो किसानों को राहत देने के संबंध में आगे निर्णय लिया जा सकता है।
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