विरार: वसई पूर्व के मौजे माणेकपुर स्थित मिठागर विभाग की करीब 550 एकड़ बहुमूल्य सरकारी जमीन पर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण, अवैध भराव, अनाधिकृत निर्माण और सड़कें बनाए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। ‘परिवर्तन संगठन’ ने इस पूरे मामले पर कड़ा संज्ञान लेते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने की गुहार लगाई है।
भूमाफियाओं और अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका परिवर्तन संगठन के कार्याध्यक्ष शिवप्रताप सिंह सोमवंशी ने मुख्यमंत्री को एक पत्र भेजकर आरोप लगाया है कि माणेकपुर के सर्वे नंबर 151, 152 और 153 में बड़े स्तर पर भूमाफिया सक्रिय हैं। संगठन ने पत्र में आशंका जताई है कि मिठागर विभाग के कुछ भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों की सांठगांठ के बिना इतना बड़ा अतिक्रमण संभव नहीं है।
दस्तावेजों में हेराफेरी कर बनाई जा रही हैं गगनचुंबी इमारतें शिकायत पत्र में चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया गया है कि माणेकपुर से सटे गोखिरे गांव की ज़मीन के दस्तावेजों और अनुमतियों (NOCs) का गलत इस्तेमाल कर माणेकपुर की सरकारी जमीन पर निर्माण कार्य को अंजाम दिया जा रहा है। संगठन ने इस क्षेत्र में बन रही 20, 22 और 35 मंजिला बहुमंजिला इमारतों के मालिकाना हक, एफएसआई (FSI), निर्माण अनुमति, पर्यावरण NOC और अन्य वैधानिक मंजूरियों की बारीकी से जांच कराने की मांग की है।
‘ग्रीष्मा गार्डन’ की तर्ज पर आम खरीदारों से धोखाधड़ी का खतरा संगठन ने वर्ष 2009-10 के दौरान सर्वे नंबर 152 पर बने ‘ग्रीष्मा गार्डन’ का उदाहरण देते हुए चेतावनी दी है कि यदि समय रहते इस अवैध निर्माण को नहीं रोका गया, तो गाढ़ी कमाई से फ्लैट खरीदने वाले आम नागरिकों को भारी आर्थिक और मानसिक नुकसान झेलना पड़ सकता है।
संगठन ने की ये प्रमुख मांगें:
- सरकारी जमीन का तुरंत सीमांकन (Demarcation), तकनीकी सर्वेक्षण और आरसीसी (RCC) फेंसिंग कराई जाए।
- सभी संदिग्ध और अवैध निर्माण कार्यों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए।
- कागजातों में हेराफेरी पाए जाने पर संबंधित डेवलपर्स, बिचौलियों और लिप्त सरकारी अधिकारियों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज हो।
- इस पूरे मामले की पारदर्शी जांच के लिए एक निश्चित समयसीमा तय कर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।










