वसई-विरार में शहर अभियंता के इस्तीफे और स्मार्ट मीटर हटाने की मांग को लेकर चल रहा ‘सड़क सत्याग्रह’ अब और अधिक आक्रामक होता नजर आ रहा है। आंदोलन के छठे दिन प्रदर्शनकारियों ने साफ कर दिया है कि उनका धैर्य अब जवाब दे चुका है। पिछले पांच दिनों तक राजनीतिक शिष्टाचार का पालन करने के बाद, अब आंदोलनकारियों ने सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों से सीधे सवाल पूछने का मन बना लिया है।
शिष्टाचार की सीमा समाप्त, अब सीधे जवाब की मांग विवेक तिवारी के नेतृत्व में चल रहे इस अनशन और सड़क सत्याग्रह के दौरान आंदोलनकारियों का कहना है कि उन्होंने पांच दिनों तक शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के सामने रखीं। हालांकि, इसके बावजूद किसी भी ओर से अपेक्षित प्रतिक्रिया न मिलने के कारण अब उनका संयम टूट गया है।
‘पक्ष-विपक्ष’ पर उठे तीखे सवाल प्रदर्शन के दौरान गूंज रहे नारे—जैसे “पक्ष निकम्मा, विपक्ष निकम्मा; वसई-विरार किसका जिम्मा?”—इस बात का स्पष्ट संकेत हैं कि जनता अब राजनीतिक व्यवस्था से सीधे जवाब चाहती है। आंदोलनकारियों का कहना है कि शहर की बुनियादी समस्याओं के प्रति जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही और उनके प्रयासों को जनता के सामने लाना उनकी मुख्य जिम्मेदारी है।
आगे और तेज हो सकता है आंदोलन छठे दिन के तेवरों को देखते हुए यह साफ है कि आने वाले दिनों में आंदोलन का दायरा और बढ़ सकता है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो राजनीतिक दलों और नेताओं को जनता के सामने अपनी भूमिका और उदासीनता पर स्पष्टीकरण देना होगा।










