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“वसई-विरार की जनता दूधखुली नहीं, सब समझती है!” मनोज पाटील ने प्रशासन को घेरा |

October 22, 2026 3:57 PM
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कचरा प्रबंधन और जनजागरूकता के ठेके पर महासभा में बहस; 935 करोड़ रुपये के ठेके के बावजूद कचरा नहीं उठने का आरोप, प्रस्ताव पर फैसला टला

विरार | 22 अक्टूबर

वसई-विरार शहर में कचरा प्रबंधन को लेकर 21 अक्टूबर 2026 को हुई महानगरपालिका की महासभा में जोरदार बहस हुई। विपक्ष के नेता मनोज पाटील ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए अतिरिक्त आयुक्त संजय हेरवाडे के सामने सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “वसई-विरार की जनता दूधखुली नहीं है, उसे सब कुछ समझ में आता है।”

मनोज पाटील का आरोप था कि शहर में नियमित रूप से कचरा नहीं उठाया जा रहा है, लेकिन नागरिकों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने के नाम पर अलग से एजेंसी नियुक्त करने की तैयारी की जा रही है।

935 करोड़ रुपये के ठेके के बावजूद कचरा प्रबंधन पर सवाल

महानगरपालिका की महासभा में नागरिकों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने, गीले और सूखे कचरे के पृथक्करण तथा व्यवहार परिवर्तन के लिए एजेंसी नियुक्त करने के प्रस्ताव पर चर्चा हुई।

बताया गया कि शहर में दैनिक कचरा संग्रहण और प्रबंधन के लिए लगभग 935 करोड़ रुपये का ठेका दिया गया है। विपक्ष ने सवाल उठाया कि जब मौजूदा ठेके में ही जनजागरूकता से संबंधित प्रावधान शामिल हैं, तो अलग से एजेंसी नियुक्त करने की जरूरत क्यों पड़ रही है।

“नागरिकों को नहीं, अधिकारियों को प्रशिक्षण देने की जरूरत”

अतिरिक्त आयुक्त संजय हेरवाडे ने प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत नागरिकों को गीले और सूखे कचरे को अलग रखने, गीले कचरे से खाद बनाने और सूखे कचरे के पुनर्चक्रण के प्रति जागरूक करना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि शहर में स्वच्छता बनाए रखना प्रशासन के साथ-साथ नागरिकों की भी जिम्मेदारी है।

इस पर विपक्ष के नेता मनोज पाटील ने आरोप लगाया कि ठेकेदारों से ठीक से काम नहीं कराया जा रहा है और उनके खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय नागरिकों को जागरूक करने की योजना बनाई जा रही है। उन्होंने दावा किया कि उनके वार्ड के कई इलाकों में आठ से दस दिनों तक कचरा नहीं उठाया गया।

प्रस्ताव पर तत्काल फैसला नहीं, विशेष महासभा में होगी चर्चा

लंबी बहस के बाद जनजागरूकता एजेंसी नियुक्त करने के प्रस्ताव को तत्काल मंजूरी नहीं दी गई। इस विषय पर विस्तृत चर्चा के लिए विशेष महासभा बुलाकर अंतिम निर्णय लेने का फैसला किया गया।

अब इस बात पर नजर रहेगी कि महानगरपालिका कचरा संग्रहण की व्यवस्था में सुधार और प्रस्तावित जनजागरूकता अभियान को लेकर आगे क्या कदम उठाती है।

नोट: 935 करोड़ रुपये के ठेके और कई दिनों तक कचरा नहीं उठने संबंधी बातें उपलब्ध समाचार सामग्री में दिए गए विवरण और विपक्ष के आरोपों पर आधारित हैं।

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