नालासोपारा: नालासोपारा पूर्व के तुलिंज क्षेत्र में आरक्षित भूखंडों पर धड़ल्ले से चल रहे अवैध निर्माणों के खिलाफ अब विरोध के स्वर मुखर होने लगे हैं। इस गंभीर मुद्दे को लेकर ‘धर्मराज कामगार संघटना’ के अध्यक्ष शिवप्रताप सिंह सोमवंशी ने वसई-विरार महानगरपालिका (VVMC) के आयुक्त को एक लिखित ज्ञापन सौंपा है। इस ज्ञापन में उन्होंने सर्वे नंबर 85 और 86 की आरक्षित भूमि पर बनी कथित अवैध दुकानों और ढांचों को बिना किसी देरी के तुरंत जमींदोज करने की पुरजोर मांग की है।
ट्रैफिक जाम और जलजमाव से त्रस्त हैं नागरिक
सौंपे गए ज्ञापन में इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की गई है कि स्टेशन से सटे इस मुख्य आरक्षित क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण हो चुके हैं। इसके कारण नालासोपारा स्टेशन परिसर में दिन-ब-दिन ट्रैफिक जाम की गंभीर समस्या पैदा हो रही है। सड़कों पर वाहनों की पार्किंग के लिए पर्याप्त जगह नहीं बची है और पैदल चलने वाले यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा, इन अवैध निर्माणों की वजह से बारिश के पानी की निकासी का प्राकृतिक मार्ग भी पूरी तरह बाधित हो गया है, जिससे मानसून के दौरान जलजमाव का खतरा बढ़ जाता है। इन सभी कारणों से जनता के हितों को सीधे तौर पर नुकसान पहुंच रहा है और जिस उद्देश्य के लिए इस भूमि को आरक्षित किया गया था, वह भी पूरी तरह विफल होता नजर आ रहा है।
प्रशासनिक सुस्ती पर खड़े हुए सवाल
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू प्रशासनिक लापरवाही का है, जिसका जिक्र ज्ञापन में विशेष रूप से किया गया है। मिली जानकारी के अनुसार, करीब तीन साल पहले 5 अक्टूबर 2023 को ही प्रभाग समिति ‘बी’ के तत्कालीन प्रभारी सहायक आयुक्त सुरेश पाटिल ने संबंधित भूखंड मालिकों को भूमि से जुड़े वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए नोटिस जारी किया था। इसके बावजूद, अब तक प्रशासन की ओर से कोई भी निर्णायक या अंतिम दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे स्थानीय नागरिकों में मनपा की कार्यप्रणाली को लेकर भारी नाराजगी और आक्रोश है।
MRTP एक्ट के तहत कड़ी कार्रवाई की मांग
संगठना के अध्यक्ष शिवप्रताप सिंह सोमवंशी ने मनपा आयुक्त से मांग की है कि इस पूरे मामले की अत्यंत गंभीरता के साथ जांच की जाए। उन्होंने महाराष्ट्र रीजनल एंड टाउन प्लानिंग (MRTP) अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज कर सर्वे नंबर 85 और 86 पर बने सभी अवैध व्यावसायिक गालों और अवैध निर्माणों को तुरंत हटाने की गुहार लगाई है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी मांग की है कि इस कार्रवाई में तीन साल तक जानबूझकर देरी करने वाले और दोषियों को मूक संरक्षण देने वाले संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भी सख्त प्रशासनिक और विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जाए।







