विरार
विरार पूर्व के कतकारीपाड़ा-चंदनसार क्षेत्र स्थित श्मशानभूमि और आसपास की बस्तियों में जर्जर बिजली के खंभे, लटकते तार और बंद पड़ी स्ट्रीट लाइट नागरिकों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बने हुए हैं। सामाजिक कार्यकर्ता नईम एन. इद्रिसी द्वारा बार-बार मुद्दा उठाने के बावजूद वसई-विरार शहर महानगरपालिका प्रशासन की सुस्ती बरकरार है, जिससे भारी बारिश के दौरान स्थानीय निवासियों पर जान-माल का खतरा मंडरा रहा है।
एक साल पहले सर्वेक्षण, फिर भी काम अटका
गंभीर बात यह है कि लगभग एक वर्ष पूर्व महानगरपालिका के विद्युत विभाग के सुपरवाइजर संतोष ने स्वयं मौके पर पहुंचकर क्षेत्र का निरीक्षण और सर्वेक्षण किया था। उस समय जल्द कार्रवाई का भरोसा दिया गया था, लेकिन 12 महीने बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। बारिश के मौसम में घनी आबादी वाले झोपड़पट्टी इलाके में झुके हुए जर्जर खंभे और खुले लटकते तार किसी बड़ी अनहोनी की आशंका जता रहे हैं।
श्मशानभूमि में अंधेरे से अंतिम संस्कार में बाधा
स्थानीय श्मशानभूमि परिसर में प्रकाश व्यवस्था ठप होने से रात के समय अंतिम संस्कार के लिए आने वाले नागरिकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अंतिम संस्कार जैसी संवेदनशील प्रक्रिया के दौरान पर्याप्त रोशनी न होना प्रशासन की उदासीनता को दर्शाता है।
प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
सामाजिक कार्यकर्ता नईम एन. इद्रिसी ने मनपा प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए पूछा कि सर्वेक्षण के बाद फॉलोअप किस स्तर पर अटका और मरम्मत का काम पूरे एक साल तक क्यों लंबित रखा गया? उन्होंने मांग की है कि कागजी कार्रवाई और आश्वासनों का दौर बंद कर मौके पर तुरंत काम शुरू किया जाए। साथ ही, सर्वेक्षण के बाद लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांग कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।








