वसई। विधानसभा चुनाव के बाद वसई-विरार की राजनीति में बदले समीकरणों का असर अब स्थानीय राजनीतिक और सामाजिक हलकों के साथ-साथ मीडिया जगत में भी दिखाई देने की चर्चा है। वरिष्ठ पत्रकार संजय प्यारेलाल गुप्ता ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर पत्रकारिता की निष्पक्षता और स्वतंत्रता पर सवाल उठाए हैं।
गुप्ता के अनुसार, चुनाव के बाद कुछ स्थानीय पत्रकारों की राजनीतिक गतिविधियों में बढ़ती सक्रियता चर्चा का विषय बनी रही। आरोप है कि कुछ पत्रकारों ने निष्पक्ष पत्रकारिता की भूमिका से हटकर सत्ता प्रतिष्ठान के करीब होने की कोशिश की और सरकारी कार्यक्रमों, राजनीतिक आयोजनों तथा प्रशासनिक बैठकों में उनकी मौजूदगी लगातार दिखाई दी।
हालांकि, अब राजनीतिक परिस्थितियों में बदलाव के साथ ऐसे कुछ पत्रकारों को कथित तौर पर पहले जैसी राजनीतिक तवज्जो नहीं मिलने की चर्चाएं स्थानीय स्तर पर हो रही हैं। इसे लेकर राजनीतिक और पत्रकारिता जगत में अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
संजय प्यारेलाल गुप्ता का कहना है कि पत्रकारिता का मूल दायित्व सत्ता के साथ खड़ा होना नहीं, बल्कि जनता के सवालों और समस्याओं को निष्पक्षता से सामने रखना है। किसी राजनीतिक दल, नेता या सत्ता प्रतिष्ठान के साथ अत्यधिक नजदीकी पत्रकार की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकती है।




