पालघर। महाराष्ट्र के वन मंत्री एवं पालघर जिले के पालक मंत्री गणेश नाईक के विशेष प्रयासों से बहाडोली गांव में वन विभाग द्वारा महत्वाकांक्षी ‘बहाडोली जामुन प्रोसेसिंग उद्योग परियोजना’ को मंजूरी मिल गई है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य जामुन उत्पादक किसानों को स्थायी बाजार उपलब्ध कराना, उनकी आय में वृद्धि करना और गांव के आर्थिक विकास को नई गति प्रदान करना है।
ग्रामसभा में परियोजना की विस्तृत जानकारी
बहाडोली ग्राम पंचायत कार्यालय में आयोजित ग्रामसभा में पालघर वन परिक्षेत्र अधिकारी (प्रादेशिक) सुशील नांदवटे, वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, सरपंच, उपसरपंच, ग्राम पंचायत सदस्य और स्थानीय ग्रामीण उपस्थित रहे। हालांकि आवश्यक कोरम न पूरा होने के कारण ग्रामसभा को स्थगित करना पड़ा, लेकिन इस दौरान वन परिक्षेत्र अधिकारी सुशील नांदवटे ने ग्रामीणों को परियोजना की बारीकियों से अवगत कराया।
किसानों की आय स्थिर करने का लक्ष्य
वन अधिकारियों के अनुसार, बहाडोली के लगभग 60 से 70 प्रतिशत किसान जामुन उत्पादन से जुड़े हैं और यह फसल गांव की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। जामुन सीजन की शुरुआत में किसानों को अच्छे दाम मिलते हैं, लेकिन सीजन के अंत में कीमतों में भारी गिरावट आ जाती है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है। प्राकृतिक आपदाएं और बाजार में मांग-आपूर्ति का असंतुलन भी किसानों के लिए चुनौती बने रहते हैं। इन्हीं समस्याओं के समाधान के तहत जामुन का मूल्य संवर्धन (Value Addition) कर किसानों को स्थायी आय का स्रोत उपलब्ध कराने के लिए यह परियोजना शुरू की जा रही है।
पारदर्शी खरीद और स्थानीय युवाओं को रोजगार
परियोजना के तहत किसानों से जामुन की सीधी खरीद की जाएगी और भुगतान पूरी पारदर्शिता के साथ समय पर सुनिश्चित किया जाएगा। उद्योग की स्थापना और संचालन के दौरान स्थानीय युवाओं को रोजगार के व्यापक अवसर मिलेंगे, जिससे ग्रामीण क्षेत्र में बेरोजगारी कम करने में मदद मिलेगी।
आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा उद्योग
करीब 6,000 से 8,000 वर्गफुट क्षेत्र में स्थापित होने वाले इस उद्योग में जामुन की प्रोसेसिंग, ग्रेडिंग, उत्पाद निर्माण, पैकेजिंग और भंडारण के लिए अत्याधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। परियोजना में विशेषज्ञों, तकनीशियनों और प्रशिक्षित कर्मचारियों की नियुक्ति भी की जाएगी, जिससे गुणवत्तापूर्ण उत्पाद तैयार करने में सहायता मिलेगी।
पारदर्शी संचालन और निगरानी तंत्र
उद्योग का संचालन प्रारंभिक पांच वर्षों तक अनुभवी और पात्र संस्था द्वारा किया जाएगा। फूड लाइसेंस, विपणन, अंतरराष्ट्रीय बाजार, कंपनी कानून और श्रम कानूनों सहित सभी तकनीकी एवं कानूनी मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा। उद्योग स्थिर होने के बाद संयुक्त वन प्रबंधन समिति (JFMC) को प्रबंधन हस्तांतरित करने पर विचार किया जाएगा।
परियोजना की निगरानी के लिए ग्रामसभा के माध्यम से एक स्वतंत्र समन्वय एवं निगरानी समिति का गठन किया जाएगा। उद्योग की मासिक प्रगति रिपोर्ट और वित्तीय जानकारी JFMC समिति को प्रस्तुत की जाएगी, जबकि प्रत्येक वर्ष ग्रामसभा में कार्यों का लिखित प्रतिवेदन भी रखा जाएगा।
अधिकारियों और ग्रामीणों का सकारात्मक रुख
वन परिक्षेत्र अधिकारी (प्रादेशिक) सुशील नांदवटे ने कहा, “इस परियोजना से जामुन उत्पादक किसानों को स्थायी बाजार, स्थानीय युवाओं को रोजगार और बहाडोली गांव के आर्थिक विकास को नई दिशा मिलेगी। ग्रामीणों के सहयोग से इसे राज्य के आदर्श ग्रामीण मूल्य संवर्धन उद्योग के रूप में विकसित करने के लिए वन विभाग प्रतिबद्ध है।”
उपसरपंच राहुल पाटील ने वन विभाग के अधिकारियों का आभार व्यक्त करते हुए आश्वासन दिया कि ग्राम पंचायत और ग्रामीण इस परियोजना को सफल बनाने के लिए पूरा सहयोग देंगे।







