मुंबई:
महाराष्ट्र के गडचिरोली जिले में आदिवासी और वन-आधारित समुदायों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की गरिमामयी उपस्थिति में महाराष्ट्र शासन के वस्त्रोद्योग विभाग (रेशीम संचालनालय) और ‘BAIF इंस्टिट्यूट फॉर सस्टेनेबल लाइवलीहुड्स एंड डेवलपमेंट’ के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।
‘विशेष टसर रेशम विकास कार्यक्रम’ से मिलेगा आजीविका को बढ़ावा
इस रणनीतिक साझेदारी का मुख्य उद्देश्य गडचिरोली के दूरदराज इलाकों में रहने वाले आदिवासियों के लिए टिकाऊ रोजगार के अवसर पैदा करना है। समझौते के तहत क्षेत्र में “विशेष टसर रेशम विकास कार्यक्रम” चलाया जाएगा, जिसके जरिए आधुनिक और उपयुक्त तकनीकों का हस्तांतरण सीधे किसानों और स्थानीय कारीगरों तक किया जाएगा।
योजना की मुख्य विशेषताएं और कार्यान्वयन रणनीति
इस करार के तहत टसर रेशम उत्पादन को गति देने के लिए एक व्यापक और समन्वित कार्ययोजना तैयार की गई है, जिसमें निम्नलिखित बिंदु शामिल हैं:
- तकनीकी व मैदानी सहायता: जमीनी स्तर पर टसर खेती का बेहतर कार्यान्वयन और निरंतर तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करना।
- वित्तीय व भौतिक नियोजन: परियोजना के लिए सटीक भौतिक और वित्तीय ढांचा तैयार करना।
- फंडिंग का अभिसरण: विभिन्न सरकारी योजनाओं और वित्तीय संसाधनों का सही तालमेल (Convergence) सुनिश्चित करना।
- निगरानी एवं समन्वय: कार्यक्रम की प्रभावी निगरानी (Monitoring) और विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना।
गडचिरोली के विकास को मिलेगी नई दिशा
समझौता ज्ञापन के दौरान वस्त्रोद्योग मंत्री संजय सावकारे और BAIF के प्रबंध निदेशक डॉ. भरत काकडे सहित कई वरिष्ठ अधिकारी व गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।
राज्य सरकार का मानना है कि इस पहल से गडचिरोली जिले में टसर रेशम उद्योग को एक नई पहचान मिलेगी। स्थानीय समुदायों को न केवल रोजगार मिलेगा, बल्कि वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनकर मुख्यधारा से जुड़ सकेंगे।







