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वसई-विरार में प्लास्टिक प्रतिबंध प्रभावहीन, नालों में जमा पॉलिथीन मानसून में जलभराव का कारण बन सकती है |

June 4, 2026 1:44 PM
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महाराष्ट्र सरकार द्वारा प्लास्टिक थैलियों पर प्रतिबंध लगाने के बावजूद वसई-विरार शहर में इसका उपयोग खुलेआम जारी है। प्रतिबंधित प्लास्टिक सामग्री के बढ़ते उपयोग का सीधा असर शहर की स्वच्छता और जल निकासी व्यवस्था पर पड़ रहा है। शहर के नालों, सड़कों और खाली पड़े भूखंडों पर प्लास्टिक कचरे का जमावड़ा देखकर नागरिक महानगरपालिका की कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं।

नाला सफाई के दौरान निकला प्लास्टिक का अंबार

आगामी मानसून को देखते हुए वसई-विरार महानगरपालिका ने शहरभर में नाला सफाई अभियान शुरू कर रखा है। छोटे नालों की सफाई कर्मचारी कर रहे हैं, जबकि बड़े नालों में मशीनों का उपयोग किया जा रहा है। इस दौरान नालों से भारी मात्रा में गाद निकाली जा रही है ताकि बारिश के पानी का बहाव सुचारु रहे। हालांकि, सफाई के दौरान निकाले जा रहे कचरे में प्लास्टिक थैलियों और बोतलों की सबसे अधिक मात्रा है। विशेषज्ञों का मानना है कि नालों में जमा यह प्लास्टिक बारिश के दौरान जल निकासी को रोक सकता है, जिससे शहर के विभिन्न हिस्सों में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

साप्ताहिक बाजारों से बढ़ रही समस्या

शहर में लगने वाले साप्ताहिक बाजारों से प्लास्टिक कचरे की समस्या और गंभीर हो रही है। इन बाजारों से हर सप्ताह लाखों की संख्या में प्लास्टिक थैलियां कचरे के रूप में निकल रही हैं, जो अंततः नालों और सड़कों पर जा पहुंचती हैं। नागरिकों का सुझाव है कि साप्ताहिक बाजारों में प्लास्टिक के उपयोग पर रोक लगाकर कपड़े या कागज के थैलों को बढ़ावा दिया जाए, ताकि मानसून से पहले नालों पर पड़ने वाला दबाव कम किया जा सके।

नागरिकों की मांग- सख्त कार्रवाई और जनजागृति की आवश्यकता

स्थानीय नागरिकों और पर्यावरणविदों का कहना है कि प्लास्टिक विरोधी अभियानों में निरंतरता की कमी है। उनका मत है कि नियमित जांच, सख्त जुर्माना और जनजागृति अभियान चलाकर ही इस समस्या पर काबू पाया जा सकता है।

मनपा का जवाब- वैज्ञानिक तरीके से हो रहा निस्तारण

इस संबंध में महानगरपालिका के आरोग्य विभाग के अधिकारी जितेंद्र नाइक के अनुसार, प्रतिबंधित प्लास्टिक के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी है। बाजारों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर नियमित छापेमारी की जा रही है। उन्होंने बताया कि नाला सफाई के दौरान निकाले गए प्लास्टिक कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जा रहा है। अधिकारियों ने नागरिकों से भी प्लास्टिक उपयोग कम करने और सहयोग करने की अपील की है।

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