मुंबई, 12 जून। महाराष्ट्र में निरक्षर नागरिकों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए केंद्र सरकार के ‘उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम’ को राज्य में प्रभावी तरीके से लागू किया जाएगा। स्कूल शिक्षा एवं खेल विभाग के प्रधान सचिव रणजीत सिंह देओल ने इस अभियान को राज्य के साक्षरता आंदोलन को नई दिशा देने वाला करार दिया है। उनका मानना है कि यह कार्यक्रम समाज के अंतिम व्यक्ति तक शिक्षा पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
12.40 लाख नागरिकों को साक्षर बनाने का लक्ष्य
मंत्रालय में आयोजित एक समीक्षा बैठक में प्रधान सचिव रणजीत सिंह देओल ने बताया कि राज्य में लगभग 12.40 लाख निरक्षर नागरिकों को साक्षर बनाने का स्पष्ट लक्ष्य तय किया गया है। इस मिशन को सफल बनाने के लिए सभी संबंधित विभागों, संस्थाओं और स्थानीय प्रशासन को आपसी समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए गए हैं। बैठक में शिक्षा आयुक्त सचिंद्र प्रताप सिंह, माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक शिक्षा मंडल के अध्यक्ष श्री कुलकर्णी और शिक्षा संचालनालय (योजना) के संचालक कृष्णकुमार पाटील समेत कई वरिष्ठ अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मौजूद रहे।
स्वयंसेवी संस्थाओं और जनसहभागिता पर विशेष जोर
प्रधान सचिव ने स्पष्ट किया कि साक्षरता अभियान की सफलता के लिए स्वयंसेवी संस्थाओं और स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी अनिवार्य है। उन्होंने विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में नवाचार आधारित कार्यक्रम चलाने और ‘कोई भी व्यक्ति निरक्षर न रहे’, इस संकल्प के साथ व्यापक जनजागरण अभियान चलाए जाने पर बल दिया।
‘उल्लास मेला’ के जरिए प्रेरणादायक पहल का होगा आदान-प्रदान
बैठक में साक्षरता अभियान से जुड़े स्वयंसेवकों और नवसाक्षरों को प्रोत्साहित करने के लिए ‘उल्लास मेला’ आयोजित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई। प्रधान सचिव ने बताया कि इस मेले के माध्यम से विभिन्न जिलों की सफल पहलों और प्रेरणादायक कहानियों का आदान-प्रदान किया जाएगा। राज्य में प्रतिवर्ष यह मेला आयोजित करने के लिए आवश्यक निधि भी उपलब्ध कराई जाएगी।
अन्य राज्यों के सफल मॉडल अपनाएगी राज्य सरकार
समीक्षा बैठक में राज्य साक्षरता अभियान प्राधिकरण और राज्य साक्षरता केंद्र की वार्षिक कार्ययोजना पर भी विस्तार से चर्चा हुई। अधिकारियों ने देश के उन राज्यों के सफल मॉडल और कार्यप्रणालियों का अध्ययन करने पर सहमति जताई, जो पहले ही पूर्ण साक्षर घोषित हो चुके हैं। योजनाबद्ध प्रयासों और जनसहभागिता से महाराष्ट्र को जल्द ही पूर्ण साक्षर राज्य बनाने का लक्ष्य रखा गया है।






