मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने एकल माताओं के बच्चों को उच्च और तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में विशेष प्राथमिकता देने का अहम फैसला लिया है। उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटील ने ‘एकल पाल्य योजना’ को प्रभावी बनाने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं। सरकार की इस पहल का उद्देश्य इन बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना और उन्हें सरकारी योजनाओं का सही लाभ पहुंचाना है।
प्रवेश फॉर्म में शामिल होगा नया कॉलम
मंत्री चंद्रकांत पाटील के अनुसार, अब तक उच्च शिक्षा में एकल माताओं के बच्चों की अलग से पहचान या डेटा संकलन की कोई व्यवस्था नहीं थी। इस कमी को दूर करने के लिए महाविद्यालयों के प्रवेश आवेदन पत्रों में ‘एकल पाल्य’ नाम से एक अलग कॉलम शामिल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस नई प्रणाली से ऐसे विद्यार्थियों की सटीक पहचान और पंजीकरण सुनिश्चित किया जा सकेगा।
आगामी 17 जून को प्राचार्यों की होगी बड़ी बैठक
राज्य के उच्च शिक्षण संस्थानों की वास्तविक स्थिति समझने और प्रवेश प्रक्रिया में एकल पाल्य विद्यार्थियों की सही संख्या दर्ज करने के लिए आगामी 17 जून 2026 को एक विशेष ऑनलाइन बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में राज्य के लगभग 1,500 महाविद्यालयों के प्राचार्य शामिल होंगे। बैठक में प्रत्येक महाविद्यालय में ऐसे विद्यार्थियों का अलग और व्यवस्थित रिकॉर्ड रखने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जाएंगे।
उच्च स्तरीय समिति सौंपेगी विस्तृत रिपोर्ट
इस योजना को जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए ‘साऊ एकल महिला समिति’ के राज्य संयोजक हेरंब कुलकर्णी ने पुणे में उच्च शिक्षा संचालनालय का दौरा किया और अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा की। सरकार ने बजट सत्र में एकल माताओं के लिए स्वतंत्र नीति की घोषणा की थी। महिला एवं बाल विकास विभाग के आयुक्त की अध्यक्षता वाली इस समिति में उच्च शिक्षा संचालक डॉ. शैलेंद्र देवळाणकर और हेरंब कुलकर्णी सदस्य के रूप में शामिल हैं।
यह समिति प्रवेश प्रक्रिया, छात्रावासों में प्राथमिकता, परामर्श सुविधाएं और अन्य शैक्षणिक रियायतों पर गहन अध्ययन कर राज्य सरकार को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपेगी। अधिकारियों के अनुसार, इस रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्ययोजना तैयार की जाएगी।






