वसई प्रतिनिधि:
महाराष्ट्र विधान परिषद में मंगलवार को वसई-विरार क्षेत्र की स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर महत्वपूर्ण सवाल उठाए गए। भाजपा विधान परिषद सदस्य चित्रा वाघ ने क्षेत्र में अत्याधुनिक सरकारी अस्पताल की कमी और निजी अस्पतालों द्वारा आपातकालीन इलाज से इनकार करने की घटनाओं को सदन में प्रमुखता से रखा।
गंभीर मरीजों के लिए मुंबई के अस्पतालों पर निर्भरता
चित्रा वाघ ने सदन में बताया कि वसई-विरार की तेजी से बढ़ती आबादी के बावजूद यहां कोई बड़ा सरकारी मल्टी-स्पेशलिटी अस्पताल नहीं है। सड़क दुर्घटनाओं, हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक जैसे गंभीर मामलों में मरीजों को केईएम, नायर और सायन जैसे मुंबई के बड़े अस्पतालों में ले जाना पड़ता है। दूरी और ट्रैफिक के कारण मरीज इलाज का ‘गोल्डन आवर’ गंवा देते हैं, जिससे उनकी जान को खतरा बढ़ जाता है।
निजी अस्पतालों द्वारा इलाज से इनकार का मामला
उन्होंने हाल ही में सामने आई एक घटना का जिक्र किया, जहां एक निजी अस्पताल ने चार वर्षीय बच्चे को आपातकालीन इलाज देने से मना कर दिया था। वाघ ने इसे चिंताजनक बताते हुए सरकार से सवाल किया कि कानून होने के बावजूद मरीजों को इलाज से वंचित करने वाले निजी अस्पतालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कब की जाएगी।
अचोले अस्पताल परियोजना पर मंत्री का आश्वासन
इन सवालों पर राज्य के उद्योग, निवेश और सेवा मंत्री उदय सामंत ने सदन में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से ले रही है। अचोले में प्रस्तावित सरकारी मल्टी-स्पेशलिटी अस्पताल के निर्माण कार्य को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा। साथ ही, आपातकालीन स्थिति में इलाज से इनकार करने वाले अस्पतालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। मंत्री के इस सकारात्मक जवाब के बाद क्षेत्र के नागरिकों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर उम्मीद जगी है।





