विरार प्रतिनिधि:
वसई-विरार महानगरपालिका की सोमवार को आयोजित महासभा के दौरान एक विवादित टिप्पणी को लेकर सदन में तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई। बैठक में शहर में नालों की सफाई के काम और इसके खर्च को लेकर चर्चा चल रही थी, जिसके दौरान यह घटना घटी।
नाला सफाई के खर्च पर विवाद
चर्चा के दौरान प्रशासन की ओर से नालों की सफाई पर वार्षिक खर्च का आंकड़ा पांच हजार करोड़ रुपये बताया गया। इस पर भाजपा नगरसेवक गणेश पाटिल ने आपत्ति जताई और इस जानकारी को गलत करार दिया। इसी बीच घनकचरा विभाग की उपायुक्त अर्चना दिवे से जुड़ी एक टिप्पणी ने मामले को तूल दे दिया।
उपायुक्त के आंसू और महिला नगरसेविकाओं का विरोध
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, भाजपा के गटनेता अशोक शेळके ने उपायुक्त अर्चना दिवे को संबोधित करते हुए एक कथित उपहासात्मक और द्विअर्थी टिप्पणी की। यह टिप्पणी उपायुक्त को आपत्तिजनक लगी, जिससे वे भावुक हो गईं और सदन में ही उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। इसके बाद सत्ताधारी पक्ष की महिला नगरसेविकाओं ने इस टिप्पणी पर कड़ा विरोध जताया और सदन में अपनी नाराजगी व्यक्त की।
आयुक्त का सख्त रुख, मर्यादा का रखने को कहा
मामले की गंभीरता को देखते हुए महानगरपालिका आयुक्त ने भी इस टिप्पणी पर तीव्र नाराजगी जताई। उन्होंने सभी सदस्यों को चर्चा के दौरान भाषा और व्यवहार में संयम बरतने की हिदायत दी। आयुक्त ने स्पष्ट किया कि जनप्रतिनिधियों को सदन की गरिमा और मर्यादा का पूर्ण पालन करना चाहिए। इस घटना के बाद सदन में कुछ देर तक तनाव का माहौल रहा और यह मामला प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।





