मुंबई: महाराष्ट्र विधानसभा के मानसून सत्र में शिक्षा से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा हुई. वसई विधानसभा की विधायक स्नेहा दुबे पंडित ने सदन में औचित्य के प्रश्न के जरिए राज्य में शिक्षा की वर्तमान स्थिति और सुधार के लिए कई महत्वपूर्ण मांगें रखीं.
बारहवीं तक मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा की मांग
विधायक स्नेहा दुबे पंडित ने सदन में मांग की कि राज्य के हर बच्चे को बारहवीं कक्षा तक शिक्षा का अधिकार मिलना चाहिए. उन्होंने शिक्षा का अधिकार (आरटीई) कानून की आयु सीमा 6 से 18 वर्ष तक बढ़ाने और बारहवीं तक की शिक्षा को मुफ्त और अनिवार्य करने की मांग की. इसके साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (NEP-2020) और नीति आयोग की सिफारिशों को राज्य में प्रभावी तरीके से लागू करने पर भी जोर दिया.
ड्रॉपआउट रोकने और संविदा शिक्षकों के वेतन पर चिंता
विधायक ने नौवीं और दसवीं कक्षा में बढ़ती स्कूल छोड़ने की दर पर गहरी चिंता जताई. उन्होंने इस समस्या को रोकने के लिए सरकार से ठोस और प्रभावी योजना बनाने की मांग की. इसके अलावा, उन्होंने पालघर जिले में संविदा शिक्षकों के वेतन भुगतान में हो रही देरी का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने बताया कि वेतन संबंधी समस्याओं के कारण शिक्षकों की कक्षाएं प्रभावित हो रही हैं, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित हो रही है.
सरकार से शीघ्र कार्रवाई का आग्रह
स्नेहा दुबे पंडित ने कहा कि विद्यार्थियों का भविष्य सुरक्षित करना और उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना राज्य सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है. उन्होंने सदन में सरकार से अपील की कि इन सभी मुद्दों पर शीघ्र कार्रवाई की जाए ताकि शिक्षा प्रणाली में सुधार हो सके और विद्यार्थियों को बिना किसी बाधा के पढ़ने का मौका मिले.





