नागपुर:
अंतरराष्ट्रीय व्याघ्र दिवस 2026 के अवसर पर नागपुर में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्य में बाघ संरक्षण को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र वैज्ञानिक दृष्टिकोण और आधुनिक तकनीक के सटीक संयोजन से बाघों के संरक्षण और संवर्धन को एक नई ऊंचाई पर ले जा रहा है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रकृति की खाद्य श्रृंखला (Food Chain) को संतुलित रखने में बाघों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है, और राज्य पिछले तीन दशकों से इस दिशा में निरंतर प्रयासरत है।
AI और कैमरा ट्रैकिंग से थमेगा मानव-वन्यजीव संघर्ष
मुख्यमंत्री ने बताया कि बाघ परियोजनाओं (Tiger Reserves) के आसपास के क्षेत्रों में मानव-वन्यजीव संघर्ष को न्यूनतम स्तर पर लाने के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। बाघों की आवाजाही और गतिविधियों पर बारीक नज़र रखने के लिए विस्तृत कैमरा ट्रैकिंग के साथ-साथ AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित अर्ली वॉर्निंग सिस्टम को लागू किया गया है, जिससे समय रहते ग्रामीणों को सतर्क किया जा सके। इसके अलावा, वन विभाग की पारदर्शी पुनर्वास योजना से प्रभावित ग्रामीण भी स्वेच्छा से बाघ अभयारण्य क्षेत्रों से बाहर बसने में सहयोग दे रहे हैं।
वैश्विक स्तर पर भारत और महाराष्ट्र का दबदबा
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने गर्व जताया कि दुनिया के कुल बाघों की आबादी का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा भारत में निवास करता है। उन्होंने रेखांकित किया कि वैश्विक स्तर पर निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप बाघों की संख्या में वृद्धि हासिल करने वाले देशों में केवल भारत और नेपाल ही सफल रहे हैं। इस सफलता में महाराष्ट्र का योगदान अभूतपूर्व रहा है और राज्य में बाघों की संख्या में लगातार सकारात्मक बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। उन्होंने कहा कि बाघ संरक्षण केवल वन विभाग का काम नहीं, बल्कि संपूर्ण समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
बाघ संरक्षण के लिए ‘पंचसूत्री योजना’ का ऐलान
संरक्षण कार्यों को अधिक संगठित और प्रभावी बनाने के लिए मुख्यमंत्री ने एक विशेष ‘पंचसूत्री योजना’ की घोषणा की, जिसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- मानव-वन्यजीव संघर्ष में कमी: एआई तकनीक और त्वरित सुरक्षा उपायों से स्थानीय निवासियों और बाघों दोनों की सुरक्षा।
- हरित आजीविका (Green Livelihood): टाइगर रिजर्व के आसपास रहने वाले ग्रामीणों के लिए पर्यावरण-अनुकूल आजीविका के साधन विकसित करना।
- CSR फंड का उपयोग: कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) नीतियों के जरिए वन्यजीव संरक्षण के लिए अतिरिक्त वित्तीय संसाधन जुटाना।
- सतत पर्यटन नीति (Sustainable Tourism): पर्यावरण संतुलन को नुकसान पहुंचाए बिना टिकाऊ पर्यटन को बढ़ावा देना।
- वन विकास में राजस्व का पुनर्निवेश: पर्यटन से अर्जित होने वाली आय का सीधा उपयोग वनों और वन्यजीवों के संवर्धन में करना।
इस अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री गणेश नाईक, राज्यमंत्री डॉ. पंकज भोयर, राज्यमंत्री आशीष जयस्वाल, विधायक सुमित वानखेड़े सहित भूटान, कंबोडिया और बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देशों के राजनयिक व प्रतिनिधि भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।











