पालघर:
महाराष्ट्र के पालघर जिले से न्याय की एक मिसाल पेश करने वाली खबर सामने आई है। डहाणू तालुका में वर्ष 2021 में एक 9 वर्षीय मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म कर उसकी बर्बरता से हत्या करने वाले आरोपी को अदालत ने कठोरतम सजा सुनाई है। पालघर जिला सत्र न्यायालय की जिला न्यायाधीश-1 एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ए. आर. रहाणे ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए ‘मृत्यु तक फांसी’ (Death until death) और 50 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है।
सामान लेने गई मासूम को बनाया शिकार
रोंगटे खड़े कर देने वाली यह घटना 27 सितंबर 2021 की है। पीड़िता (उम्र 9 वर्ष 8 महीने) को उसकी मां ने घर के पास दुकान से सामान लेने भेजा था। इसी दौरान पड़ोसी आरोपी प्रमुल उर्फ प्रफुल उर्फ प्रमोद रत्ना घोसे (46) ने मासूम को बहला-फुसलाकर अपने घर बुलाया। आरोपी ने बच्ची को मोबाइल पर अश्लील तस्वीरें दिखाईं और उसके साथ दरिंदगी की। जब पीड़िता ने दर्द में रोते हुए अपने पिता को पूरी बात बताने की बात कही और वहां से भागने लगी, तो आरोपी घबरा गया।
कोयते से किए 15 वार, बचाने आए ग्रामीण पर भी हमला
अमानवीयता की हदें पार करते हुए आरोपी कोयता (धारदार हथियार) लेकर बच्ची के पीछे भागा और रास्ते में ही उसके सिर, गर्दन और चेहरे पर करीब 15 बार जानलेवा वार कर उसे मौत के घाट उतार दिया। इस दौरान एक स्थानीय ग्रामीण (40 वर्ष) ने बच्ची को बचाने का प्रयास किया, लेकिन आरोपी ने उस पर भी वार कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया।
POCSO और हत्या मामले में पालघर की पहली फांसी
मामले की गहन जांच तत्कालीन डहाणू सहायक पुलिस अधीक्षक नित्यानंद झा ने की। अदालत में विशेष सरकारी वकील एडवोकेट रेखा इवराले ने पुख्ता सबूत और गवाह पेश कर प्रभावी पैरवी की। अपराध की वीभत्सता, क्रूरता और आरोपी के व्यवहार को देखते हुए अदालत ने इसे ‘रेअरेस्ट ऑफ रेयर’ (दुर्लभ से दुर्लभतम) मामला माना। पालघर जिले के इतिहास में POCSO और जघन्य हत्या के मामले में ‘अंतिम सांस तक फांसी’ की सजा का यह पहला मामला माना जा रहा है।











