विरार:
महाराष्ट्र की सांस्कृतिक धरोहर और स्थानीय भाषा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विरार में एक सराहनीय सामाजिक पहल की शुरुआत हुई है। महाराष्ट्र शासन के परिवहन विभाग, राज्य मराठी विकास संस्था, कोकण मराठी साहित्य परिषद और मुंबई मराठी साहित्य संघ के संयुक्त तत्वावधान में “महाराष्ट्र माझा, मराठी माझी संवाद भाषा पाठ्यक्रम” अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत ‘आपुलकी फाउंडेशन’ और ‘पी.एस. कोचिंग क्लासेस’ की ओर से विरार शहर में गैर-मराठी ऑटो चालकों को मराठी भाषा का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
मनवेलपाड़ा और विरार शहर में प्रशिक्षण सत्र
विरार के मनवेलपाड़ा और विरार शहर शाखा में आयोजित इस विशेष प्रशिक्षण अभियान का नेतृत्व पी.एस. कोचिंग क्लासेस की कुमारी पूर्वा उदय अरुण जाधव कर रही हैं। इस सामाजिक पहल के माध्यम से अब तक करीब 250 अमराठी ऑटो रिक्शा चालकों को दैनिक बोलचाल और सामान्य संवाद के लिए मराठी भाषा का प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
यात्रियों के साथ बढ़ेगा सहज संवाद
इस प्रशिक्षण का मुख्य लक्ष्य ऑटो चालकों और आम यात्रियों के बीच भाषा के कारण आने वाली दूरी को खत्म करना है। क्लास के दौरान चालकों को दैनिक व्यवहार में उपयोग होने वाले मराठी शब्द, किराए और गंतव्य से जुड़े वाक्य तथा यात्रियों से सम्मानपूर्वक बातचीत करने के तरीके सिखाए जा रहे हैं।
आपसी जुड़ाव और सौहार्द की ओर कदम
आपुलकी फाउंडेशन (महाराष्ट्र) के अध्यक्ष उदय अरुण जाधव ने बताया कि यह पहल महाराष्ट्र में रहने वाले विभिन्न भाषाई समुदायों के बीच भाषाई खाई को पाटने और आपसी जुड़ाव बढ़ाने का एक सकारात्मक प्रयास है। जब ऑटो चालक यात्रियों की स्थानीय भाषा में बात करते हैं, तो इससे न केवल यात्रा सुखद बनती है बल्कि समाज में आपसी सम्मान और सौहार्द भी बढ़ता है।








