वसई-विरार:
वसई-विरार शहर महानगरपालिका (VVMC) में कचरा प्रबंधन और बायो-माइनिंग प्रोजेक्ट के नाम पर भारी भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने आरोप लगाया है कि ठेकेदारों, सलाहकारों और नगर निगम के अधिकारियों की मिलीभगत से ₹64 करोड़ से अधिक का घोटाला अंजाम दिया गया है।
बुधवार को नालासोपारा (पश्चिम) स्थित भाजपा कार्यालय में आयोजित पत्रकार परिषद में विपक्ष के नेता मनोज पाटील और जिलाध्यक्ष प्रज्ञा पाटील ने इस मामले से जुड़े कई दस्तावेज मीडिया के सामने प्रस्तुत किए।
बोगस बिल और कचरे के वजन में हेरफेर
भाजपा के अनुसार, दिसंबर 2023 में साई यूटिलिटी कॉन्ट्रैक्टर प्राइवेट लिमिटेड को 13 लाख टन पुराने कचरे के निष्पादन (Processing) का ठेका ₹835 प्रति टन की दर से दिया गया था। आरोप है कि कचरे की वास्तविक मात्रा और घनत्व (Density) के आंकड़ों में फर्जीवाड़ा कर करीब ₹39 करोड़ के फर्जी बिल पास कराए गए।
पार्टी का दावा है कि अप्रैल 2024 में कचरे का घनत्व 340 किलो प्रति घनमीटर दिखाया गया था, जिसे जनवरी 2026 में बढ़ाकर 840 किलो प्रति घनमीटर दर्ज किया गया। प्राकृतिक रूप से कचरा कम होने के बावजूद गलत मापदंडों के आधार पर ठेकेदार को मोटा भुगतान किया गया।
दोपहिया वाहनों से 27 टन कचरा ढोने के फर्जी सर्टिफिकेट
आरडीएफ (Refuse Derived Fuel) के परिवहन में भी भारी फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है। भाजपा का आरोप है कि जिन गाड़ियों के नंबर परिवहन प्रमाणपत्र में दर्ज किए गए हैं, वे दोपहिया और छोटी चारपहिया गाड़ियाँ हैं। इन छोटे वाहनों के ज़रिए 26 से 27 टन आरडीएफ सीमेंट कंपनियों तक भेजने के फर्जी दावे और सर्टिफिकेट जमा किए गए।
इतना ही नहीं, नगर निगम द्वारा जब इस संबंध में पुनः जांच के लिए पत्र भेजे गए, तो जवाब में फर्जी ई-मेल आईडी और डोमेन का उपयोग कर झूठी पुष्टि भेजी गई। भाजपा ने इसे सरासर जालसाजी और धोखाधड़ी करार दिया है।
17 हजार ब्रास पत्थर का अवैध उत्खनन
एमआरएफ (MRF) परियोजना के नाम पर पर्यावरण और राजस्व को भी भारी नुकसान पहुँचाया गया है। आरोप है कि लगभग 10 हजार वर्ग मीटर प्राकृतिक पहाड़ी क्षेत्र को अवैध रूप से खोदकर करीब 17 हजार ब्रास पत्थर निकाले गए। भाजपा के अनुसार, इन पत्थरों की बिक्री और भुगतान प्रक्रिया में वित्तीय नियमों और पर्यावरणीय मानकों की जमकर अनदेखी की गई।
₹24.64 करोड़ के SLF प्रोजेक्ट पर CAG की आपत्ति
पत्रकार परिषद में 2015 से 2017 के बीच शुरू की गई ‘वैज्ञानिक भू-भराव’ (SLF) परियोजना का मुद्दा भी उठा। केंद्र और राज्य सरकार से 90% अनुदान प्राप्त इस ₹24.64 करोड़ के प्रोजेक्ट में भारी अनियमितता पाई गई थी।
भाजपा ने बताया कि इस प्रोजेक्ट में हुए व्यर्थ खर्च पर कैग (CAG) ने भी कड़ी आपत्ति जताई थी। इसके अलावा, आईआईटी मुंबई (IIT Bombay) की थर्ड-पार्टी जांच में कई गंभीर खामियां सामने आने के बावजूद संबंधित अधिकारियों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
दोषियों पर FIR और फॉरेंसिक ऑडिट की मांग
विपक्ष के नेता मनोज पाटील ने स्पष्ट कहा है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि संबंधित ठेकेदार, तकनीकी सलाहकार, मनपा अधिकारियों और फर्जी प्रमाणपत्र जारी करने वालों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत तत्काल FIR दर्ज की जाए।
भाजपा ने अब तक हुए सभी भुगतानों का फॉरेंसिक ऑडिट कराने और घोटाले की राशि वसूलने की मांग की है। पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द से जल्द कड़ी कार्रवाई नहीं की गई, तो भाजपा सड़कों पर उतरकर व्यापक आंदोलन करेगी।








