विरार:
वसई-विरार शहर महानगरपालिका (VVMC) के ठोस कचरा प्रबंधन विभाग में हुए बहुचर्चित ₹64 करोड़ के बायो-माइनिंग घोटाले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। भाजपा नेता और विपक्ष के नेता मनोज पाटील के लगातार विरोध और महासभा में सबूत पेश करने के बाद बोळींज पुलिस थाने में ठेकेदार संस्था ‘साई यूटिलिटी कॉन्ट्रैक्टर्स प्राइवेट लिमिटेड’ के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली गई है।
मनपा के सहायक आयुक्त जितेंद्र हरेश्वर नाईक की शिकायत पर ठेकेदार हिंदकुमार श्रीकांत यादव (58) और सब-कॉन्ट्रैक्टर अझरुद्दीन बशीर सय्यद को आरोपी बनाया गया है।
फर्जी ई-मेल और सीमेंट कंपनियों के जाली सर्टिफिकेट
पुलिस शिकायत के अनुसार, साई यूटिलिटी को दिसंबर 2023 में भोयदापाड़ा और गोखिवरे डंपिंग ग्राउंड में जमा 15 लाख घनमीटर पुराने कचरे के वैज्ञानिक प्रसंस्करण का ठेका दिया गया था। नियम के अनुसार कचरे से तैयार आरडीएफ (Refuse Derived Fuel) को सीमेंट कंपनियों को भेजा जाना था।
ठेकेदार ने अल्ट्राटेक सीमेंट और दालमिया सीमेंट को 50,000 मीट्रिक टन आरडीएफ भेजने के बिल और प्रमाणपत्र जमा कर मनपा से ₹37.66 करोड़ रुपये वसूले। हालांकि, जब मनपा ने मई 2026 में कंपनियों से वेरिफिकेशन कराया, तो अल्ट्राटेक ने केवल 500 मीट्रिक टन का ऑर्डर देने की बात कही, जबकि दालमिया सीमेंट ने किसी भी तरह के सर्टिफिकेट जारी करने से साफ इनकार कर दिया। जांच से बचने के लिए आरोपियों ने फर्जी ई-मेल आईडी बनाकर फर्जी सत्यापन भेजने का प्रयास भी किया।
बाइक और कार से 27 टन कचरा ढोने का अनोखा फर्जीवाड़ा
घोटाले का सबसे हास्यास्पद और गंभीर पहलू परिवहन दस्तावेजों में सामने आया। आरडीएफ ढोने के लिए जिन वाहनों के नंबर दर्ज किए गए थे, वे होंडा यूनिकॉर्न बाइक, मारुति डिजायर, टाटा इंडिका कार, पावर टिलर और टाटा एस जैसे छोटे वाहन थे। दस्तावेजों में इन दोपहिया और चारपहिया गाड़ियों से एक ही बार में 26 से 27 टन कचरा ढोना दिखाया गया था।
कचरे की डेंसिटी में हेरफेर कर ₹39 करोड़ का चूना
जांच रिपोर्ट के मुताबिक, सलाहकारों की मिलीभगत से कचरे के घनत्व (Density) के आंकड़ों में भी भारी हेरफेर की गई। अप्रैल 2024 में जो घनत्व 340 किग्रा/घनमीटर था, उसे जनवरी 2026 तक बढ़ाकर 840 किग्रा/घनमीटर दिखाया गया। इस फर्जीवाड़े के जरिए करीब ₹39 करोड़ रुपये के बोगस बिल पास करवाए गए।
इसके अलावा, कचरा वर्गीकरण परियोजना के नाम पर पहाड़ियों से 17 हजार ब्रास (लगभग 49 हजार घनमीटर) पत्थर का अवैध खनन कर बेचने और मनपा से ₹4.09 करोड़ की दोहरी वसूली का भी आरोप है। इन अनियमितताओं के कारण महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB) ने मनपा पर ₹12 करोड़ का जुर्माना भी ठोका है।
2015 के पुराने प्रोजेक्ट पर CAG की आपत्ति और FIR
इस घोटाले के तार 2015-2017 के ‘खिलारी इन्फ्रास्ट्रक्चर’ को दिए गए पुराने वैज्ञानिक लैंडफिल प्रोजेक्ट से भी जुड़ रहे हैं, जिस पर कैग (CAG) ने ₹24.64 करोड़ रुपये के व्यर्थ खर्च पर कड़ी आपत्ति जताई थी। आईआईटी मुंबई (IIT Bombay) की 2017 की जांच रिपोर्ट में भी भारी खामियां मिली थीं।
विपक्ष के नेता मनोज पाटील ने पूरे मामले का फॉरेंसिक ऑडिट कराने, फर्जी बिलों से दिए गए पैसों की वसूली करने और भ्रष्टाचार में शामिल मनपा अधिकारियों पर भी आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग की है। फिलहाल बोळींज पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।








