वसई-विरार महानगरपालिका द्वारा बढ़ाए गए पानी टैक्स को लेकर स्थानीय राजनीति में भारी बवाल शुरू हो गया है। सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पार्षदों और विपक्षी नगरसेवकों ने महानगरपालिका मुख्यालय के मुख्य द्वार पर ज़ोरदार विरोध प्रदर्शन किया। विरोधी पक्षनेता मनोज पाटील के नेतृत्व में आयोजित इस आंदोलन ने महासभा की शुरुआत से पहले ही मनपा प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया।
जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ का आरोप प्रदर्शन कर रहे नगरसेवकों ने आक्रामक रुख अपनाते हुए प्रशासन के खिलाफ जम कर नारेबाजी की। विरोधी पक्षनेता मनोज पाटील का कहना है कि मनपा पहले से ही नागरिकों से भारी मात्रा में प्रॉपर्टी टैक्स (गृहकर) और वाटर टैक्स वसूल रही है। ऐसे में पानी की दरों में की गई नई बढ़ोतरी से आम जनता की जेब पर सीधा असर पड़ रहा है। विपक्ष ने इस कर-वृद्धि को जनविरोधी करार देते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की है।
‘सुविधाएं शून्य, टैक्स में बढ़ोतरी’: विपक्ष का कड़ा ऐतराज आंदोलनकारी नगरसेवकों का तर्क है कि महानगरपालिका क्षेत्र में रहने वाले लोग पहले से ही पीने के पानी और मूलभूत सुविधाओं की किल्लत से जूझ रहे हैं। मूलभूत सुविधाएं सुधारने के बजाय प्रशासन लगातार नए टैक्स लादने में जुटा हुआ है। भाजपा नेताओं ने स्पष्ट किया कि जब तक बढ़ी हुई दरें वापस नहीं ली जातीं, उनका विरोध जारी रहेगा। इस अचानक हुए प्रदर्शन के चलते मनपा मुख्यालय परिसर में काफी समय तक राजनीतिक गहमागहमी बनी रही।








