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वसई: पेल्हार में पारंपरिक ‘बावखल’ बुझाकर बनाई इमारत, AIMIM का तहसील कार्यालय के बाहर धरना |

September 1, 2026 5:52 AM
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वसई-विरार क्षेत्र में पारंपरिक जलस्रोतों (बावखल) के अस्तित्व पर मंडरा रहे खतरे को लेकर राजनीति और सामाजिक विरोध गर्मा गया है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने पेल्हार इलाके में एक प्राकृतिक बावखल को मिट्टी से पाटकर उस पर अवैध व्यावसायिक इमारत बनाने का आरोप लगाते हुए तहसील कार्यालय के बाहर जोरदार धरना प्रदर्शन किया है।

गूगल मैप और 1999 के ड्रोन सर्वे का हवाला AIMIM वसई-विरार (पालघर) इकाई के अनुसार, धानिव-पेल्हार क्षेत्र के विभिन्न सर्वे नंबरों पर सालों पुराना पारंपरिक जलस्रोत ‘बावखल’ मौजूद था। संगठन ने दावा किया कि 1999 से 2012 तक के ड्रोन सर्वे, गूगल मैप्स और मनपा के डीपी प्लान (DP Plan) में यह प्राकृतिक जलस्रोत स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। इसके बावजूद भू-माफियाओं और बिल्डरों ने मनपा अधिकारियों की साठगांठ से इसे मिट्टी से भर दिया और वहां कमर्शियल बिल्डिंग का निर्माण कर लिया।

सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन; आपराधिक केस दर्ज करने की मांग AIMIM के जिलाध्यक्ष अम्मार अब्दुल्लाह पटेल ने पालघर के उपजिलाधिकारी और वसई के तहसीलदार को सौंपे पत्र में 16 जुलाई 2024 के सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का स्मरण कराया, जिसमें प्राकृतिक जलस्रोतों के संरक्षण को अनिवार्य बताया गया है।

AIMIM की मुख्य मांगें:

  • पेल्हार क्षेत्र के सभी पारंपरिक बावखलों का तुरंत पुनः सर्वेक्षण और निरीक्षण कराया जाए।
  • जांच पूरी होने तक संबंधित निर्माण की अनुमतियों पर तत्काल रोक लगाई जाए।
  • प्राकृतिक जलस्रोत को नुकसान पहुंचाने वाले डेवलपर्स और दोषियों पर आपराधिक मुकदमा (FIR) दर्ज किया जाए।

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