वसई-विरार (राधा कृष्णन सिंह): नालासोपारा पूर्व के प्रभाग क्रमांक 16 में जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति से नागरिकों को मुक्ति दिलाने के लिए बनाई गई महानगरपालिका की योजनाएं कागजों तक ही सिमट कर रह गईं। ₹1.25 करोड़ की लागत से सड़क को ऊंचा उठाने का प्रस्तावित काम अधूरा रहने के कारण इस मानसून की पहली ही मूसलाधार बारिश में पूरा इलाका जलमग्न हो गया और लोगों के घरों व सड़कों पर 4 से 5 फीट तक पानी भर गया।
ई-टेंडर और वर्क ऑर्डर के बावजूद अटका काम
वसई-विरार महानगरपालिका के दस्तावेजों के अनुसार, दक्षिणा मेडिकल से लेकर सेंट फ्रांसिस स्कूल तक सड़क की ऊंचाई बढ़ाने के लिए ई-टेंडर प्रक्रिया आयोजित की गई थी। इसमें मेसर्स वैदेही एंटरप्रायझेस ने अनुमानित दर से 28.04 प्रतिशत कम दर पर सबसे न्यूनतम निविदा प्रस्तुत की थी और काम स्वीकृत हुआ था। उद्देश्य यह था कि इस वर्ष नागरिकों को जलभराव से राहत मिले, लेकिन धरातल पर काम पूरा नहीं हो सका।
STP निर्माण बना रोड़ा, नागरिकों को भुगतना पड़ा खामियाजा
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) का निर्माण कार्य अधूरा होने की वजह से सड़क की ऊंचाई बढ़ाने का काम बीच में ही रोक दिया गया। इसका सीधा असर Central Park और आसपास के इलाकों में रहने वाले नागरिकों पर पड़ा। बारिश के बाद चारों तरफ पानी भर जाने से लोगों का जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया और उन्हें दैनिक कार्यों के लिए भी घुटने से ऊपर तक पानी से होकर गुजरना पड़ा।
प्रशासनिक सफाई बनाम जनता का आक्रोश
इस पूरे मामले पर वसई-विरार महानगर पालिका के अभियंता प्रदीप पचांगे ने सफाई देते हुए कहा, “इस कार्य का वर्क ऑर्डर जारी कर दिया गया था, लेकिन एसटीपी (STP) का काम चलने के कारण इसे रोकना पड़ा ताकि नवनिर्मित सड़क दोबारा खराब न हो। बारिश का मौसम बीतने के बाद इसका निर्माण कार्य फिर से शुरू कराया जाएगा।”
वहीं दूसरी ओर, स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता रत्नाकर तिवारी ने प्रशासन पर तंज कसते हुए सवाल उठाया, “सड़क ऊंचा करने का यह टेंडर केवल एक चुनावी जुमला था या प्रशासन सचमुच जनता की समस्याओं को दूर करना चाहता था, यह तो राम ही जाने।”
अब क्षेत्र के नागरिकों ने मांग की है कि बारिश खत्म होते ही इस प्रोजेक्ट को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए ताकि उन्हें हर बारिश में इस नकीय स्थिति से न जूझना पड़े।








