वसई-विरार: स्मार्ट मीटर और बढ़े हुए बिजली बिलों के मुद्दे को लेकर वसई-विरार की स्थानीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है। बहुजन विकास आघाडी (BVA) के वरिष्ठ नेता और वसई-विरार शहर महानगरपालिका (VVCMC) के महापौर अजीव पाटिल द्वारा 7 सितंबर को स्मार्ट मीटर के विरोध में आयोजित सर्वदलीय रैली में शामिल होने से सामाजिक कार्यकर्ता एवं वसई विरार जिला कांग्रेस कमिटी के महासचिव सुहैल खान और उनकी टीम ने स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया है।
सुहैल खान और उनकी टीम पिछले 35 दिनों से स्मार्ट मीटर तथा अत्यधिक बिजली बिलों के खिलाफ ‘जन बिजली अधिकार’ आंदोलन चला रही है। आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि 35 दिनों तक चले धरने के दौरान महापौर अजीव पाटिल की ओर से उनका समर्थन नहीं किया गया, जिसके चलते अब आयोजित की जा रही सर्वदलीय रैली को लेकर टीम ने दूरी बनाने का फैसला किया है।
35 दिनों के सत्याग्रह को नजरअंदाज करने पर नाराजगी
‘जन बिजली अधिकार’ आंदोलन के समर्थकों के अनुसार, सुहैल खान के नेतृत्व में विरार पश्चिम स्थित MSEDCL कार्यालय के बाहर 35 दिनों तक लगातार धरना दिया गया। इस दौरान 700 से अधिक उपभोक्ताओं के बढ़े हुए बिजली बिलों और स्मार्ट मीटर की जबरन स्थापना से संबंधित शिकायतें दर्ज कराई गईं।
आंदोलन से जुड़े लोगों का आरोप है कि इस दौरान महापौर अजीव पाटिल जनता के समर्थन में वहां नहीं पहुंचे और न ही आंदोलन के प्रयासों की सराहना की। टीम का कहना है कि ऐसे में अब अचानक सर्वदलीय रैली का आयोजन राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
रवि भूषण ने रैली पर उठाए सवाल
‘जन बिजली अधिकार’ आंदोलन के प्रमुख सहयोगी रवि भूषण ने महापौर अजीव पाटिल की रैली को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि स्मार्ट मीटर का मुद्दा आम जनता की समस्या से जुड़ा है और इसे राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
रवि भूषण ने कहा कि जब आम जनता ‘जन बिजली अधिकार’ आंदोलन के तहत 35 दिनों तक सड़क पर संघर्ष कर रही थी, उस समय अजीव पाटिल की ओर से समर्थन नहीं मिला। उनके मुताबिक, मौजूदा रैली को बहुजन विकास आघाडी (BVA) के खिसकते वोट बैंक को फिर से हासिल करने की राजनीतिक कवायद के तौर पर देखा जा रहा है।
‘जन बिजली अधिकार’ आंदोलन के प्रमुख बिंदु
35 दिवसीय धरना:
वसई विरार जिला कांग्रेस कमिटी के महासचिव सुहैल खान के नेतृत्व में चले आंदोलन के दौरान स्मार्ट मीटर की जबरन स्थापना, उपभोक्ताओं के अचानक बढ़े भारी-भरकम बिजली बिलों और MSEDCL की लापरवाही के खिलाफ 700 से अधिक शिकायतें दर्ज कराई गईं।
जनहित की लड़ाई:
‘जन बिजली अधिकार’ आंदोलन की टीम का कहना है कि बिजली जैसी बुनियादी जरूरत से जुड़े मुद्दे को किसी राजनीतिक दल के वोट बैंक से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। टीम के अनुसार, यह आम जनता के अधिकारों का आंदोलन है और इसे बिना किसी राजनीतिक स्वार्थ के आगे भी जारी रखा जाएगा।








