वसई: वसई-विरार शहर में स्मार्ट मीटर को लेकर राजनीतिक और सामाजिक माहौल गरमा गया है। एक ओर महावितरण स्मार्ट मीटर के तकनीकी और आर्थिक फायदे बता रहा है, वहीं दूसरी ओर बढ़े हुए बिजली बिलों की शिकायतों को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों और नागरिकों की ओर से विरोध किया जा रहा है। विरोधी दलों ने 7 सितंबर को हाईवे रोको आंदोलन की चेतावनी दी है।
महावितरण ने बताया स्मार्ट मीटर का आर्थिक लाभ
महावितरण के अनुसार, स्मार्ट मीटर तकनीक के इस्तेमाल से वसई-विरार मंडल के करीब 5 लाख ग्राहकों को पिछले डेढ़ वर्ष में कुल 11 करोड़ 37 लाख 50 हजार रुपये की बचत हुई है।
विभाग के मुताबिक, वसई क्षेत्र के करीब 2 लाख ग्राहकों को चालू वित्त वर्ष में 2 करोड़ 41 लाख रुपये का लाभ मिला है। वहीं, विरार क्षेत्र के 2.88 लाख ग्राहकों को करीब 4 करोड़ रुपये का लाभ मिलने की बात कही गई है।
मोबाइल ऐप और बिजली खपत पर छूट का दावा
महावितरण का कहना है कि स्मार्ट मीटर के जरिए ग्राहकों को मोबाइल ऐप पर हर घंटे बिजली खपत की जानकारी मिलती है। इसके अलावा सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे के बीच बिजली का इस्तेमाल करने पर प्रति यूनिट 85 पैसे की छूट मिलने की जानकारी दी गई है।
विभाग के अनुसार, डिजिटल भुगतान और ‘गो ग्रीन’ जैसी सुविधाओं के कारण भी ग्राहकों को आर्थिक लाभ मिल रहा है।
स्मार्ट मीटर को लेकर अफवाहों पर विश्वास न करने की अपील
कल्याण परिमंडल के मुख्य अभियंता चंद्रमणि मिश्रा ने स्पष्ट किया है कि स्मार्ट मीटर पोस्टपेड ही हैं। उन्होंने बिजली दर बढ़ने या स्मार्ट मीटर को लेकर फैल रही अफवाहों पर विश्वास न करने की अपील की है।
बढ़े बिजली बिलों को लेकर नागरिकों में नाराजगी
दूसरी ओर, नागरिकों का आरोप है कि स्मार्ट मीटर लगाए जाने के बाद कई उपभोक्ताओं को कथित तौर पर अधिक बिजली बिल प्राप्त हो रहे हैं। इसी मुद्दे को लेकर विभिन्न राजनीतिक दल एकजुट हुए हैं और 7 सितंबर को हाईवे रोको आंदोलन करने की चेतावनी दी है।
महावितरण के दावों और नागरिकों की शिकायतों के बीच स्मार्ट मीटर को लेकर वसई-विरार में विवाद बढ़ता दिखाई दे रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे को लेकर आंदोलन और राजनीतिक गतिविधियां तेज होने के आसार हैं।







