विरार: वसई-विरार शहर महानगरपालिका (VVMC) की स्थायी समिति की बैठक में जोरदार हंगामा देखने को मिला। प्रशासनिक शासनकाल के दौरान लिए गए फैसलों और पारित प्रस्तावों को बिना किसी जांच के ‘कार्योत्तर मंजूरी’ देने का आरोप लगाते हुए विपक्षी सदस्यों ने बैठक का बहिष्कार किया और वॉकआउट कर दिया।
एजेंडे में शामिल थे 41 विषय, जांच की मांग ठंडे बस्ते में
स्थायी समिति की सदस्य प्रज्ञा कमलाकर पाटील ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि बैठक के एजेंडे में कुल 41 विषय शामिल किए गए थे। इनमें से 25 से 30 प्रस्ताव सीधे तौर पर प्रशासनिक राज के दौरान मंजूर किए गए कार्यों से संबंधित थे।
उन्होंने याद दिलाया कि 23 अप्रैल 2026 की महासभा में विपक्ष के नेता मनोज पाटील ने प्रशासनिक कार्यकाल के सभी कार्यों का स्पेशल ऑडिट कराने और एक श्वेतपत्र (White Paper) जारी करने की मांग रखी थी, जिसे सर्वसम्मति से मंजूरी भी मिली थी।
पुराने भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने का आरोप
विपक्ष का गंभीर आरोप है कि प्रशासनिक काल में कई विकास कार्यों में अनियमितताएं और कथित भ्रष्टाचार हुआ था। अब जांच पूरी होने से पहले ही उन पुराने प्रस्तावों और टेंडरों को निर्वाचित निकाय से पास कराकर नियमित (रेगुलराइज) करने की कोशिश की जा रही है। विपक्षी नेताओं के अनुसार, कई काम कागजों पर पूरे दिखाए जा चुके हैं और अब सिर्फ औपचारिक मंजूरी की प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
पारदर्शी प्रशासन की अनदेखी का दावा
विपक्ष ने साफ किया कि वे जनहित के विकास कार्यों के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन प्रशासनिक कार्यकाल की धांधलियों पर पर्दा डालने वाले किसी भी प्रस्ताव पर अपनी मुहर नहीं लगाएंगे। यदि ऐसे प्रस्तावों को चुपचाप पास कर दिया गया, तो भविष्य की जांच में जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी गाज गिर सकती है।
प्रशासन और सत्तापक्ष पर आपत्तियों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाते हुए स्थायी समिति के सभी 6 विपक्षी सदस्यों ने सभात्याग कर अपना विरोध दर्ज कराया।








