विरार: लगातार जारी मूसलाधार बारिश और तेज हवाओं के कारण वसई-विरार महानगरपालिका क्षेत्र की जलापूर्ति व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। प्रसिद्ध सूर्या जलापूर्ति योजना सहित प्रमुख जल तंत्र प्रभावित होने से शहर के लाखों नागरिकों को लगातार तीन दिनों तक पानी की बूंद-बूंद के लिए तरसना पड़ा। इस गंभीर समस्या को लेकर पूर्व नगरसेविका रितू सचिन चौबे और पूर्व नगरसेवक योगेश सिंह ने महानगरपालिका आयुक्त से मुलाकात कर कड़े शब्दों में ज्ञापन सौंपा।
“हर साल मानसून में ठप होती है व्यवस्था” – पूर्व तैयारियों पर उठाए सवाल
आयुक्त से मुलाकात के दौरान रितू चौबे ने मनपा प्रशासन की कार्यशैली और आपदा प्रबंधन पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि हर साल मानसून के समय जलापूर्ति ठप होना यह साबित करता है कि प्रशासन के पास न तो कोई ठोस रणनीति है और न ही पूर्व तैयारियां।
मूलभूत अधिकार का हनन: “स्वच्छ और पर्याप्त पेयजल पाना हर नागरिक का संवैधानिक और मूलभूत अधिकार है। मानसून की आड़ में जनता को प्यासा रखना प्रशासन की बड़ी नाकामी है। इस समस्या का अब स्थायी समाधान निकालना ही होगा।” — रितू चौबे
नगरसेविका रितू चौबे की 3 मुख्य मांगें
ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन के समक्ष तीन प्रमुख और त्वरित मांगें रखी गई हैं:
- वैकल्पिक बिजली व्यवस्था: सभी पंपिंग स्टेशनों और जल शुद्धीकरण केंद्रों (WTP) पर उच्च क्षमता वाले DG सेट (जनरेटर) और बैकअप पावर सिस्टम तुरंत स्थापित किए जाएं।
- लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई: जलापूर्ति व्यवस्था ठप होने के कारणों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं।
- मुफ्त पानी के टैंकर: आपातकालीन स्थिति वाले प्रभावित क्षेत्रों में मनपा की ओर से तुरंत मुफ्त पानी के टैंकर भेजे जाएं।
उग्र आंदोलन की चेतावनी
रितू चौबे ने मनपा प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यदि नागरिकों की इस मूलभूत समस्या का जल्द से जल्द निवारण नहीं किया गया, तो जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए उग्र और व्यापक लोकतांत्रिक आंदोलन छेड़ा जाएगा।





