विरार: विरार के गोखीवरे गांव स्थित तालाब के सौंदर्यीकरण कार्य को लेकर एक बार फिर प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। सामाजिक कार्यकर्ता और कामगार आघाड़ी के महाराष्ट्र प्रदेश सचिव संजय कैलाश पांडेय ने आरोप लगाया है कि तालाब के सौंदर्यीकरण पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद कार्य आज भी अधूरा है, जबकि संबंधित ठेकेदार को कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र जारी कर भुगतान भी कर दिया गया है।
करोड़ों खर्च के बाद भी अधूरे हैं विकास कार्य
संजय पांडेय के अनुसार, तालाब के सौंदर्यीकरण के लिए स्वीकृत निधि का उपयोग कर जलभराव रोकने, सफाई, सुरक्षा दीवार निर्माण और अन्य विकास कार्य किए जाने थे। लेकिन जमीनी स्तर पर ये सभी काम अधूरे पड़े हैं। उनका कहना है कि कार्य अधूरा होने के बावजूद ठेकेदार को पूर्णता प्रमाण पत्र देकर भुगतान किया जाना प्रशासनिक विसंगतियों को दर्शाता है।
2017 से उठ रहा है मुद्दा, नहीं हुई ठोस कार्रवाई
पांडेय ने बताया कि इस मुद्दे पर पहली शिकायत वर्ष 2017 में तत्कालीन आयुक्त को दी गई थी। इसके बाद वर्ष 2023 में भी मनपा प्रशासन का ध्यान इस ओर आकर्षित कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि तालाब परिसर में अतिक्रमण तेजी से बढ़ रहा है और रखरखाव के अभाव में क्षेत्र की स्थिति दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है।
अतिक्रमण और रखरखाव के अभाव से बिगड़ रही स्थिति
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि गोखीवरे तालाब का सही तरीके से संरक्षण और विकास किया जाए, तो यह क्षेत्र के लोगों के लिए स्वास्थ्य, पर्यटन और पर्यावरण की दृष्टि से लाभदायक साबित हो सकता है। लेकिन वर्तमान में अतिक्रमण और देखरेख के अभाव से तालाब की मूल उपयोगिता प्रभावित हो रही है।
उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग
संजय पांडेय ने इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका सवाल है कि जब कार्य अधूरा था, तो ठेकेदार को पूर्णता प्रमाण पत्र कैसे जारी किया गया और भुगतान किस आधार पर किया गया? उन्होंने नियमों का उल्लंघन करने वाले संबंधित अधिकारियों और ठेकेदार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। स्थानीय नागरिकों ने भी मनपा से पारदर्शी जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करने और अधूरे पड़े सौंदर्यीकरण कार्य को जल्द पूरा कराने की मांग की है।







