विरार:
वसई-विरार महानगरपालिका द्वारा आयोजित होने वाली 13वीं ‘मेयर मैराथन’ के प्रस्तावित 3.95 करोड़ रुपये के बजट को लेकर राजनीतिक गलियारों में पारा चढ़ गया है। हाल ही में 17 जुलाई 2026 को हुई महानगरपालिका की महासभा में इस मुद्दे पर जमकर हंगामा हुआ। विपक्ष ने मनपा प्रशासन से मैराथन के कुल खर्च, स्पॉन्सर्स (प्रायोजकों) से मिली रकम और धावकों के पंजीकरण शुल्क का पूरा हिसाब-किताब सार्वजनिक करने की पुरजोर मांग की है।
कमाई और स्पॉन्सरशिप छिपाने का आरोप
महासभा के दौरान विपक्ष के नेता मनोज पाटिल ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि केवल खर्च का खाका पेश किया गया है, जबकि कमाई की जानकारी दबा दी गई।
- रजिस्ट्रेशन फीस का गणित: विपक्ष का दावा है कि मैराथन में देश भर से लगभग 58 हजार धावक हिस्सा लेते हैं, जिनमें से करीब 40 हजार धावकों से ₹800 प्रति व्यक्ति पंजीकरण शुल्क लिया जाता है।
- पारदर्शिता का अभाव: करोड़ों रुपये की इस रजिस्ट्रेशन फीस और स्पॉन्सर्स से मिलने वाले फंड का इस्तेमाल कहाँ किया गया, इसका कोई स्पष्ट ब्योरा सदन में नहीं रखा गया।
मनोज पाटिल का कहना है कि महासभा में कोई भी वित्तीय प्रस्ताव आधी-अधूरी जानकारी के साथ पेश नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि यह भविष्य का आधिकारिक रिकॉर्ड होता है।
फिजूलखर्ची पर ‘श्वेतपत्र’ जारी करने की मांग
भाजपा नेता ने स्पष्ट किया कि उन्हें खेल आयोजनों से कोई ऐतराज नहीं है, लेकिन जनता के पैसों की फिजूलखर्ची बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि:
“इवेंट मैनेजमेंट, सजावट, फोटोग्राफी और अन्य व्यवस्थाओं के नाम पर लाखों रुपये का संदिग्ध खर्च दिखाया गया है। मैराथन के पूरे आर्थिक लेन-देन पर प्रशासन को तत्काल ‘श्वेतपत्र’ (White Paper) जारी करना चाहिए।” — मनोज पाटिल, नेता विपक्ष
1 करोड़ से सीधे 3.95 करोड़ तक कैसे पहुँचा बजट?
विपक्ष ने मैराथन के लगातार बढ़ते बजट पर भी तीखे सवाल दागे। आँकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया कि:
- पहले का बजट: लगभग ₹1 करोड़
- पिछले वर्ष का बजट: लगभग ₹2.5 करोड़
- इस वर्ष (13वाँ संस्करण) का बजट: ₹3.95 करोड़
भाजपा ने सवाल उठाया है कि बजट में इस अप्रत्याशित बढ़ोतरी की मुख्य वजह क्या है और इसका विवरण जनता के सामने रखा जाना चाहिए।
विरोध के बावजूद प्रस्ताव पास
सदन में चले लंबे हंगामे और विपक्ष के कड़े विरोध के बावजूद सत्तापक्ष ने अपने बहुमत के बल पर 3.95 करोड़ रुपये के इस बजट प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। आयोजन स्थल, मैराथन के रूट और राजनीतिक श्रेय को लेकर दोनों पक्षों में विवाद पुराना है, जो अब मनपा की राजनीति का मुख्य केंद्र बन चुका है।





