वसई-विरार। वसई-विरार क्षेत्र में इन दिनों भीषण गर्मी के बीच लगातार हो रही बिजली कटौती ने नागरिकों की परेशानियां बढ़ा दी हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, बढ़ते तापमान के बीच बिजली की अनियमित आपूर्ति से आम जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। बच्चों, बुजुर्गों और कामकाजी लोगों को सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
8 से 10 घंटे बिजली गुल, व्यापारियों को भारी नुकसान
बिजली कटौती को लेकर व्यापारियों में भी भारी नाराजगी है। व्यापारियों का कहना है कि इतनी भीषण गर्मी में दिन भर में 8 से 10 घंटे बिजली न होने से उनके कारोबार को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। व्यवसाय ठप होने से स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी बुरा असर पड़ रहा है।
जनप्रतिनिधियों की निष्क्रियता पर नाराजगी
इस गंभीर स्थिति को लेकर क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों पर भी सवाल उठने लगे हैं। नागरिकों का आरोप है कि समस्या के समाधान के लिए न सांसद सक्रिय हैं, न विधायक और न ही स्थानीय स्तर के अन्य जनप्रतिनिधि। लोगों का कहना है कि चुनाव के समय ये नेता बिजली, पानी, सड़क और गटर जैसी मूल सुविधाओं का वादा कर वोट मांगते हैं, लेकिन जीतने के बाद जनता की परेशानियों को भूल जाते हैं। नागरिकों की मांग है कि संकट की इस घड़ी में जनप्रतिनिधियों को आगे आना चाहिए और संबंधित विभागों पर दबाव बनाना चाहिए। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी है कि आने वाले चुनाव में जनता इनके कार्यों का मूल्यांकन जरूर करेगी।
महावितरण की कार्यशैली पर उठ रहे सवाल
नागरिकों ने महावितरण के अधिकारियों की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। लोगों का आरोप है कि अधिकारी सरकार से वेतन तो लेते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उनका काम नजर नहीं आता। यदि बिल भुगतान में एक दिन की भी देरी हो तो तुरंत बिजली काट दी जाती है, लेकिन 8 से 10 घंटे बिजली गुल रहने पर अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती।
नागरिकों का यह भी कहना है कि वसई-विरार में हल्की बारिश होते ही बिजली चली जाती है। साल भर तैयारियों के दावे किए जाते हैं, लेकिन गर्मी और बरसात में महावितरण की व्यवस्था नाकाम साबित होती है। इस गैर-जिम्मेदाराना रवैये का खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है।
फिलहाल, नागरिकों की मांग है कि बिजली आपूर्ति व्यवस्था में जल्द सुधार किया जाए और इस गंभीर समस्या के लिए जिम्मेदार अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों के खिलाफ प्रभावी कदम उठाए जाएं।







