जिपलाइन और ग्लास ब्रिज से बढ़ेगी पर्यटकों की रौनक
पालघर जिले के आदिवासी बहुल जव्हार और मोखाडा तालुकों को पर्यटन और ग्रामीण विकास के नए मॉडल पर विकसित किया जा रहा है। जिलाधिकारी डॉ. इंदू रानी जाखड़ ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ क्षेत्र का दौरा कर पर्यटन परियोजनाओं और बुनियादी सुविधाओं की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने कासटवाड़ी में 1.20 करोड़ रुपये की लागत से बन रही टू-वे जिपलाइन और दाभोसा जलप्रपात पर प्रस्तावित 2 करोड़ रुपये के स्कायवॉक ग्लास ब्रिज का निरीक्षण किया। उन्होंने पर्यटकों के लिए पार्किंग, फूड कोर्ट, प्रतीक्षालय और शौचालय जैसी आवश्यक सुविधाएं विकसित करने के निर्देश दिए।
आदिवासी घरों को होमस्टे में बदलने का सुझाव
कोगदा-खैरमाल मार्ग की स्थिति देखने के लिए जिलाधिकारी ने अधिकारियों के साथ करीब चार किलोमीटर पैदल यात्रा की। गेटपाडा गांव में उन्होंने पारंपरिक आदिवासी घरों को होमस्टे के रूप में विकसित करने का सुझाव दिया। इस कदम से ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे।
स्थानीय स्तर पर मिलेंगी प्रमाणपत्र सेवाएं
मोखाडा तहसील परिसर में नव स्थापित आधार और महा-ई सेवा केंद्र का उद्घाटन किया गया। इस केंद्र के माध्यम से दूरदराज के नागरिकों को आधार, जाति, आय और निवास प्रमाणपत्र जैसी सेवाएं अब स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध होंगी।
पर्यटन स्थलों पर स्वच्छता और सड़क विकास पर जोर
हनुमान पॉइंट सहित अन्य प्रमुख पर्यटन स्थलों पर स्वच्छता, कचरा प्रबंधन और प्लास्टिक मुक्त अभियान को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए गए। इसके अलावा, बारिश के दौरान संपर्कविहीन हो जाने वाले गांवों को जोड़ने के लिए सड़कों के व्यापक विकास का आराखड़ा तैयार करने को कहा गया है। जिलाधिकारी ने कहा कि पर्यटन, रोजगार और आधारभूत सुविधाओं के समन्वय से जव्हार और मोखाडा को महाराष्ट्र के प्रमुख पर्यटन केंद्रों के रूप में स्थापित किया जाएगा।







