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वसई-विरार में कचरा ढुलाई पर बड़ा विवाद: मुंबई की ‘कबाड़’ गाड़ियों के इस्तेमाल पर ठेकेदारों को कारण बताओ नोटिस |

July 31, 2026 5:58 AM
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वसई:

वसई-विरार शहर महानगरपालिका (VVMC) क्षेत्र में कचरा प्रबंधन को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। शहर में कचरा संग्रहण और परिवहन (Garbage Collection & Transportation) के लिए नियुक्त नए ठेकेदारों पर मुंबई महानगरपालिका (BMC) द्वारा पुरानी और कबाड़ घोषित की गई गाड़ियों का इस्तेमाल करने का गंभीर आरोप लगा है। इस खुलासे के बाद स्थानीय प्रशासन और नागरिकों के बीच हड़कंप मच गया है।

म्हाडा मैदान में खड़ी मिलीं BMC के लोगो वाली गाड़ियां

रिपोर्ट्स के अनुसार, वसई-विरार क्षेत्र के म्हाडा मैदान में कई ऐसी कबाड़ गाड़ियां खड़ी पाई गई हैं, जिन पर अभी भी मुंबई महानगरपालिका का नाम और लोगो बना हुआ है।

उल्लेखनीय है कि वसई-विरार शहर से रोजाना लगभग 1,000 से 1,200 मीट्रिक टन कचरा निकलता है। कचरा ढुलाई को सुचारू बनाने के लिए महानगरपालिका ने कुछ महीने पहले ही पुराने ठेके रद्द कर मेसर्स अमृत इंटरप्राइजेज, मेसर्स आर एंड बी इंफ्रा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड और मेसर्स क्रिस्टल इंटीग्रेटेड सर्विसेज लिमिटेड को नया ठेका सौंपा था।

दुर्घटना और कचरा परिवहन ठप होने की आशंका

स्थानीय निवासियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि ठेकेदारों ने लागत बचाने के चक्कर में BMC की जर्जर गाड़ियों को वसई-विरार में ला खड़ा किया है। नागरिकों का कहना है कि अगर इन खटारा गाड़ियों को सड़कों पर उतारा गया, तो ये बीच रास्ते में खराब होंगी, जिससे कचरा उठाव तो बाधित होगा ही, साथ ही गंभीर दुर्घटनाओं का खतरा भी बना रहेगा।

VVMC ने जारी किया ‘कारण बताओ’ नोटिस

मामला तूल पकड़ते ही जनप्रतिनिधियों के दबाव के बाद घनकचरा प्रबंधन विभाग हरकत में आया। विभाग ने तीनों नए ठेकेदारों को कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) जारी करते हुए इन संदिग्ध कबाड़ वाहनों को तत्काल क्षेत्र से हटाने और विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है।

“हमने संबंधित ठेकेदारों से सभी वाहनों के फिटनेस सर्टिफिकेट और तकनीकी रिपोर्ट मांगी है। जब तक वैध प्रमाणपत्र प्रस्तुत नहीं किए जाते, तब तक इन वाहनों को कचरा ढुलाई की अनुमति बिल्कुल नहीं दी जाएगी।”

जितेंद्र नाईक, सहायक आयुक्त (घनकचरा प्रबंधन विभाग)

नोटिस के 2 हफ्ते बाद भी मैदान में खड़ी हैं गाड़ियां

प्रशासन की सख्ती के बावजूद, दावों के अनुसार नोटिस जारी होने के लगभग दो सप्ताह बीत जाने के बाद भी ये गाड़ियां म्हाडा मैदान में जस की तस खड़ी हैं। नागरिकों का यह भी आरोप है कि पुरानी गाड़ियों पर केवल नया रंग-रोगन (Paint) करके उन्हें नई जैसी दिखाने की कोशिश की जा रही है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि महानगरपालिका इन बेपरवाह ठेकेदारों पर क्या सख्त कार्रवाई करती है।

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