मुंबई: महाराष्ट्र में औद्योगिक विकास को नई ऊंचाई देने के लिए राज्य सरकार ने महाराष्ट्र औद्योगिक विकास महामंडल (MIDC) के तहत भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को तेज करने का बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में वर्षा निवास स्थान पर आयोजित समीक्षा बैठक में राज्य में नए औद्योगिक क्षेत्रों (Industrial Zones) के विस्तार और निवेश परियोजनाओं को गति देने पर विस्तृत चर्चा की गई।
समय पर भूमि आवंटन से बढ़ेगा निवेश
मुख्यमंत्री फडणवीस ने बैठक में स्पष्ट किया कि राज्य में तेजी से बढ़ रहे उद्योगों के लिए भूमि का समय पर उपलब्ध होना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि भूमि अधिग्रहण में होने वाली प्रशासनिक देरी, वन अनुमति (Forest Clearance) और जटिल कानूनी प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाए, ताकि निवेशकों को किसी परेशानी का सामना न करना पड़े।
‘मिलाप’ ऑनलाइन सिस्टम से पारदर्शी आवंटन
औद्योगिक भूखंडों के आवंटन को पारदर्शी बनाने के लिए शुरू की गई ‘मिलाप’ (Milap) ऑनलाइन प्रणाली के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि:
- इस पोर्टल से आवेदन, रियल टाइम ट्रैकिंग और अलॉटमेंट ऑर्डर स्वचालित (Automated) तरीके से जारी हो रहे हैं।
- 1 अक्टूबर 2025 से 31 जुलाई 2026 के बीच राज्य में 1,183 औद्योगिक भूखंडों का सफलतापूर्वक आवंटन किया गया।
- इस आवंटन से राज्य सरकार को 5,502 करोड़ रुपये का बड़ा राजस्व (Revenue) प्राप्त हुआ है।
राज्यभर में 66 हजार एकड़ से अधिक भूमि अधिग्रहण जारी
महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों में फिलहाल 66,343 एकड़ भूमि के अधिग्रहण की कार्रवाई चल रही है। इनमें प्रमुख रूप से गडचिरोली, चंद्रपुर, नागपुर, पुणे, पालघर, छत्रपति संभाजीनगर, ठाणे, रत्नागिरी, रायगढ़, नाशिक और वर्धा जिले शामिल हैं। इसके अतिरिक्त 97 सामंजस्य करारों (MoUs) के तहत लगभग 75,234 एकड़ अतिरिक्त जमीन की मांग दर्ज की गई है।
बैठक के दौरान अविकसित भूखंडों के पुनर्विकास, भूमि आवंटन नीति में सुधार और प्रशासनिक रेड-टेपिज्म (लालफीताशाही) को कम करने जैसे अहम मुद्दों पर विस्तृत समीक्षा की गई।











