नालासोपारा (संवाददाता) – वसई-विरार महानगर पालिका क्षेत्र में बहुजन विकास आघाड़ी (बविआ) के प्रभाग समिति ‘एफ’ में लगाए गए नए होर्डिंग्स को लेकर एक अनोखा विवाद सामने आया है। पार्टी की नवनिर्वाचित सबसे कम उम्र की उत्तर भारतीय नगरसेविका एवं महिला बाल कल्याण समिति सदस्य प्रदीपिका अंतिमा अतुल सिंह की तस्वीर इन होर्डिंग्स से गायब है, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
होर्डिंग में फोटो नदारत, सोशल मीडिया से लेकर गलियारों तक चर्चा
वसई-विरार मनपा प्रभाग समिति ‘एफ’ से हाल ही में संपन्न निकाय चुनाव में नगरसेविका चुनकर आईं प्रदीपिका सिंह, अपने प्रभाग क्षेत्र में सक्रिय रूप से जनकार्यों में जुटी हुई हैं। अब तक इसी प्रभाग क्षेत्र में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों के लिए लगाए जाने वाले सभी होर्डिंग्स में नगरसेविका के तौर पर उनकी फोटो शामिल की जाती थी।
लेकिन वर्तमान में एफ प्रभाग के वार्ड क्रमांक 8 के नगरसेवक पंकज पाटिल के जन्मदिन के उपलक्ष्य में संपूर्ण प्रभाग समिति क्षेत्र में जगह-जगह लगाए गए होर्डिंग्स में एक अलग ही तस्वीर देखने को मिल रही है। इन होर्डिंग्स में प्रदीपिका सिंह को छोड़कर अन्य सभी नगरसेवकों और महिला नगरसेविकाओं की फोटो शामिल की गई है।
क्या है वास्तविकता? पार्टी प्रशासन या तकनीकी चूक?
होर्डिंग से प्रदीपिका सिंह की फोटो हटाए जाने के बाद स्थानीय स्तर पर लोगों द्वारा कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। कुछ का मानना है कि यह कोई तकनीकी या डिजाइन संबंधी चूक हो सकती है, तो कुछ इसे राजनीतिक संदेश के रूप में देख रहे हैं। हालांकि, इस मामले में अब तक न तो पार्टी प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण आया है और न ही प्रदीपिका सिंह ने इस पर कोई प्रतिक्रिया दी है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि स्थानीय निकायों में होर्डिंग्स और प्रचार सामग्री में नेताओं की फोटो का शामिल होना केवल सौंदर्य का विषय नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रतिनिधित्व और पार्टी के भीतर समन्वय का भी संकेत होता है। ऐसे में इस घटना को हल्के में लेना उचित नहीं होगा।
आगे क्या? प्रतीक्षा जवाब की
अब सवाल यह उठता है कि क्या यह मामला सिर्फ एक डिजाइन संबंधी अनदेखी है या इसके पीछे कोई राजनीतिक मंशा काम कर रही है? प्रदीपिका सिंह के समर्थकों में इसको लेकर असमंजस की स्थिति है। वहीं, पार्टी हाईकमान से स्पष्टीकरण की मांग भी उठने लगी है।
वास्तविकता क्या है, यह तो आने वाला समय ही बताएगा। लेकिन फिलहाल, यह मामला वसई-विरार की स्थानीय राजनीति में चर्चा का केंद्र बना हुआ है।







