मुंबई, 2 जून. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि भाषा के नाम पर विवाद कर राजनीतिक सत्ता तो हासिल की जा सकती है, लेकिन इससे देश का ज्ञान समाप्त हो जाएगा और वह आने वाली पीढ़ियों तक नहीं पहुंच पाएगा। उन्होंने हिंदी को देश की संपर्क सूत्र बताते हुए कहा कि इस भाषा का सम्मान किया जाना चाहिए, जिसने स्वतंत्रता की लड़ाई में अहम भूमिका निभाई है। यह बात उन्होंने मुंबई हिंदी पत्रकार संघ द्वारा आयोजित हिंदी पत्रकारिता द्विशताब्दी समारोह में कही।
भाषा विवाद और ज्ञान का ह्रास
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि हिंदी किसी विवाद का कारण नहीं है। उन्होंने कहा कि बहुभाषी होना एक योग्यता है। मातृभाषा हमारी जड़ है और इसे छोड़ने पर हम प्राकृतिक ज्ञान से दूर हो जाते हैं। लेकिन अगर मातृभाषा के साथ देश की अन्य भाषाओं को सीखा जाए, तो राष्ट्रीय ज्ञान को समझा जा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि दुनिया के जिन देशों ने तरक्की की है, उन्होंने अपनी मातृभाषा में ही शिक्षा प्रणाली को बढ़ावा दिया है।
पत्रकारिता में विश्वसनीयता की चुनौती
डिजिटल मीडिया के दौर में पत्रकारिता के सामने आई चुनौतियों पर मुख्यमंत्री ने कहा कि आज खबरों की विश्वसनीयता को लेकर संकट है। लेकिन उनका मानना है कि यह स्थिति अस्थायी है। जल्द ही पत्रकारिता अपने पुराने मूल्यों पर वापस लौटेगी। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई एक चुनौती जरूर है, लेकिन यह कभी भी किसी संपादक की सोच और विवेक की जगह नहीं ले सकती।
हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं का संबंध
कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में पहुंचे उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं के बीच कोई टकराव नहीं है। जब तक क्षेत्रीय भाषाएं आगे नहीं बढ़ेंगी, हिंदी भी आगे नहीं बढ़ सकती। मुंबई भाजपा अध्यक्ष अमित साटम ने कहा कि हिंदी देश को जोड़ने वाला धागा है, लेकिन कुछ लोग इसे विरोध करने को फैशन मानते हैं, जबकि उनके बच्चे विदेशी भाषाएं सीखते हैं। मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा ने कहा कि हिंदी जोड़ने का काम करती है और तोड़ना हमारे संस्कार में नहीं है।
200 वर्ष पूर्ण होने पर हुआ सम्मान
प्रभादेवी स्थित रविंद्र नाट्य मंदिर में आयोजित इस कार्यक्रम में हिंदी पत्रकारिता के 200 साल पूरे होने का जश्न मनाया गया। मुंबई हिंदी पत्रकार संघ के महासचिव विजय सिंह कौशिक ने बताया कि पहला हिंदी अखबार कोलकाता से शुरू हुआ था और आज हम महाराष्ट्र में इसका द्विशताब्दी समारोह मना रहे हैं, जो विविधता में एकता का प्रतीक है।
इस दौरान अभिनेता विनीत कुमार सिंह, हेमंत तिवारी, अवधेश व्यास, गंगाधर ढोबले और कुमुद संघवी चावरे को उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में अमित साटम, आदित्य दुबे सहित कई गणमान्य व्यक्ति और पत्रकार मौजूद रहे।






