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नालासोपारा गौशाला विवाद: तोड़क कार्रवाई के बाद हिंदू संगठनों का 7 जून को आंदोलन, प्रशासन और संचालकों में जुबानी जंग |

June 5, 2026 5:01 PM
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नालासोपारा पश्चिम में शनि मंदिर परिसर के पास स्थित गौशाला पर वसई-विरार शहर महानगरपालिका द्वारा की गई तोड़क कार्रवाई के बाद क्षेत्र में नया विवाद खड़ा हो गया है। जहाँ एक ओर प्रशासन इसे अवैध अतिक्रमण बता रहा है, वहीं गौशाला संचालक इसे गौ सेवा का केंद्र बताकर अपना पक्ष रख रहे हैं। इसी विरोध में विभिन्न हिंदू संगठनों ने 7 जून को महानगरपालिका मुख्यालय के बाहर आंदोलन करने की घोषणा की है।

गौशाला संचालकों का क्या है पक्ष?

गौशाला से जुड़े आशुतोष मिश्रा ने प्रेस वार्ता में बताया कि 29 मई को महानगरपालिका द्वारा की गई कार्रवाई के बाद गौशाला पर जमीन हड़पने के आरोप लगाए जा रहे हैं। उन्होंने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह गौशाला स्थानीय निवासियों द्वारा गौ माता की सेवा के लिए बनाई गई थी। मिश्रा के अनुसार, वर्ष 2023 में एक बीमार गाय की देखभाल के बाद इस गौशाला की शुरुआत हुई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि तोड़क कार्रवाई के दौरान गायों को चोटें आई हैं, जिससे स्थानीय लोगों में आक्रोश है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका संगठन संविधान और कानून के दायरे में रहकर ही आगे बढ़ेगा। उन्होंने महानगरपालिका आयुक्त से कहा कि यदि प्रशासन को जमीन कब्जाने की आशंका है, तो वह गौशाला का संचालन अपने हाथ में ले सकता है।

महानगरपालिका का क्या है कहना?

दूसरी ओर, वसई-विरार शहर महानगरपालिका ने अपने पक्ष को स्पष्ट किया है। महानगरपालिका के अनुसार, नालासोपारा-विरार लिंक रोड पर शनि मंदिर के पास सरकारी जमीन पर बिना किसी वैध अनुमति के एक पत्रा शेड बनाया गया था। प्रशासन का दावा है कि कार्रवाई से पहले सभी गायों को सुरक्षित रूप से बाहर निकाल लिया गया था और गौवंश को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। महानगरपालिका ने इसे केवल अवैध निर्माण हटाने की नियमित कार्रवाई बताया है।

7 जून को होगा बड़ा आंदोलन

गौशाला पर हुई कार्रवाई और गौवंश को हानि पहुंचने के आरोपों को लेकर क्षेत्र के विभिन्न हिंदू संगठनों में रोष है। संगठनों ने 7 जून को बड़ी संख्या में वसई-विरार शहर महानगरपालिका मुख्यालय पर धरना और आंदोलन करने की चेतावनी दी है। इस मुद्दे को लेकर क्षेत्र में सामाजिक और राजनीतिक हलचल तेज हो गई है, और सभी की निगाहें 7 जून को होने वाले आंदोलन पर टिकी हुई हैं।

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