वसई: पालघर जिले में विरार के पास स्थित वैतरणा और वाढीव बेट क्षेत्र के हजारों नागरिकों को आज भी सुरक्षित सड़क मार्ग नसीब नहीं हो सका है। मूलभूत आवागमन सुविधाओं के अभाव में स्थानीय लोगों और मासूम स्कूली बच्चों को प्रतिदिन अपनी जान जोखिम में डालकर रेलवे ट्रैक और खाड़ी के रेलवे पुल से गुजरना पड़ रहा है। इस गंभीर जनसमस्या के स्थायी समाधान के लिए अब ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ने लगा है।
फ्रेट कॉरिडोर से बढ़ा हादसों का खतरा
पश्चिम रेलवे के विरार-डहाणू सेक्शन पर स्थित वैतरणा-वाढीव क्षेत्र की आबादी काफी घनी है। हाल ही में डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) की शुरुआत के बाद इस मार्ग पर मालगाड़ियों की आवाजाही कई गुना बढ़ गई है।
- दैनिक संघर्ष: जब भी ट्रैक पर अचानक ट्रेन आती है, तो ट्रैक से गुजर रहे नागरिकों को जान बचाने के लिए रेलवे पुल के संकरे किनारों पर खड़े होना पड़ता है।
- सिर पर भारी बोझ: स्थानीय महिलाओं का कहना है कि राशन, एलपीजी गैस सिलेंडर और चावल की बोरियां तक उन्हें सिर पर लादकर रेलवे पुल पार करते हुए वैतरणा स्टेशन तक पहुंचानी पड़ती हैं।
सांसद डॉ. हेमंत सवरा ने किया जमीनी निरीक्षण
मामले की गंभीरता को देखते हुए पालघर के सांसद डॉ. हेमंत सवरा ने शनिवार को रेलवे के उच्च अधिकारियों के साथ प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया। इस दौरान विधायक राजन नाईक, भाजपा जिलाध्यक्ष प्रज्ञा पाटील और भारी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
सांसद डॉ. सवरा ने नागरिकों की समस्याएं सुनने के बाद आश्वासन दिया कि:
- स्थायी पुल: वाढीव और वैतरणा को आपस में जोड़ने वाले स्थायी पुल के निर्माण के लिए वे जल्द ही मुख्यमंत्री और जिले के पालकमंत्री से चर्चा करेंगे।
- अस्थायी फेरीबोट: जब तक पुल का निर्माण पूरा नहीं होता, तब तक नागरिकों की आवाजाही के लिए तत्काल प्रभाव से ‘फेरीबोट सेवा’ शुरू करने का प्रयास किया जाएगा।
प्रवासी संस्था ने सौंपा ज्ञापन
इस अवसर पर ‘डहाणू वैतरणा प्रवासी सेवाभावी संस्था’ ने सांसद को एक मांग पत्र सौंपा। संस्था ने वैतरणा स्टेशन परिसर में जलभराव की समस्या, जर्जर सड़कों के सुधारीकरण और यात्रियों की सुरक्षा के लिए रेलवे ट्रैक के समानांतर सुरक्षित पैदल मार्ग या फुटओवर ब्रिज (FOB) के निर्माण की पुरजोर मांग की है।











