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सीएम के आश्वासन की उड़ीं धज्जियां? वसई-नालासोपारा में उपभोक्ताओं की पीठ पीछे लगाए जा रहे स्मार्ट मीटर, कांग्रेस ने उठाए सवाल |

July 19, 2026 3:19 PM
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वसई-नालासोपारा:

महाराष्ट्र में प्रीपेड स्मार्ट मीटर को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर गरमा गया है। विधानसभा में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा दिए गए सख्त आश्वासनों के बावजूद, वसई-नालासोपारा क्षेत्र में उपभोक्ताओं की गैर-मौजूदगी में ‘चुपके से’ स्मार्ट मीटर लगाने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। कांग्रेस के जिला महासचिव रवि भूषण ने इस मुद्दे पर महावितरण और राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने इसे सरकार की कथनी और करनी में एक बड़ा विरोधाभास करार दिया है।

शीतकालीन सत्र में मुख्यमंत्री ने क्या दिया था आश्वासन?

कांग्रेस नेता रवि भूषण ने याद दिलाया कि दिसंबर 2025 के शीतकालीन विधानसभा सत्र के दौरान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सदन पटल पर स्पष्ट घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि किसी भी घरेलू बिजली उपभोक्ता के घर पर उसकी अनुपस्थिति या बिना सहमति के स्मार्ट मीटर नहीं लगाए जाएंगे। साथ ही सरकार ने यह भी भरोसा दिया था कि सामान्य उपभोक्ताओं पर प्रीपेड स्मार्ट मीटर थोपे नहीं जाएंगे और इस प्रक्रिया में कोई जबरदस्ती नहीं होगी।

“मेरे घर का बिजली बिल आया ₹16,800” – रवि भूषण का बड़ा दावा

प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए रवि भूषण ने दावा किया कि वे खुद भी महावितरण की इस मनमानी के भुक्तभोगी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके घर पर बिना किसी पूर्व सूचना या सहमति के चुपके से नया स्मार्ट मीटर इंस्टॉल कर दिया गया।

कांग्रेस नेता का आरोप:

“स्मार्ट मीटर लगते ही मेरे घर का बिजली बिल सीधे ₹16,800 आ गया। यह आम उपभोक्ताओं की जेब पर सीधे डाका है। मीटर बदलने के बाद से ही लगातार आम जनता को अत्यधिक और मनमाने बिल मिल रहे हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में डर और भारी आक्रोश का माहौल है।”

कांग्रेस ने की निष्पक्ष जांच की मांग

रवि भूषण ने राज्य सरकार और बिजली विभाग से मांग की है कि मुख्यमंत्री द्वारा विधानसभा में दिए गए वचनों का सम्मान किया जाए। उपभोक्ताओं की मौजूदगी के बिना मीटर लगाने की प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगे और जिन उपभोक्ताओं के बिल अचानक बढ़ गए हैं, उनकी शिकायतों की एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए।

महावितरण का रुख:

इस पूरे विवाद और कांग्रेस नेता द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों पर फिलहाल महावितरण (MSEDCL) की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण या बयान सामने नहीं आया है। विभाग की ओर से कोई भी प्रतिक्रिया आने पर उसे प्रमुखता से अपडेट किया जाएगा।

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