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वसई-विरार को बाढ़ मुक्त बनाने का महाप्लान: पूर्व महापौर राजीव पाटिल ने मनपा आयुक्त को सौंपा 50 वर्षों का विज़न, ₹5,000 करोड़ का आ सकता है खर्च |

July 16, 2026 3:37 PM
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विरार:

वसई-विरार शहर में हर साल मानसून के दौरान होने वाले भीषण जलभराव और बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान के लिए एक ठोस और दूरगामी ब्लूप्रिंट तैयार किया गया है। वसई-विरार महानगरपालिका (VVMC) के पूर्व व प्रथम महापौर राजीव यशवंत पाटिल ने इस गंभीर संकट से निपटने के लिए एक विस्तृत और व्यापक बाढ़ प्रबंधन योजना मनपा आयुक्त पृथ्वीराज बी.पी. के समक्ष प्रस्तुत की है। इस रणनीतिक प्रस्ताव में शहर के बुनियादी ढांचे को पूरी तरह बदलने और प्राकृतिक जलमार्गों को पुनर्जीवित करने के लिए कई युगांतकारी सुझाव दिए गए हैं।

शहरीकरण और प्राकृतिक चुनौतियों का सटीक विश्लेषण

राजीव पाटिल ने योजना की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि तीव्र गति से हो रहे शहरीकरण, प्राकृतिक जल निकासी मार्गों पर बड़े पैमाने पर हुए अतिक्रमण और समुद्र में आने वाले उच्च ज्वार-भाटा (High Tide) के त्रिकोणीय प्रभाव के कारण हर वर्ष शहर के बड़े हिस्से जलमग्न हो जाते हैं। इस संकट को दूर करने के लिए पारंपरिक तरीकों से हटकर एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने की ज़रूरत है, जिसके तहत मौजूदा नालों की सघन सफाई, उनकी गहराई और चौड़ाई बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें सीधे वैतरणा, नारंगी, तुलस, सोपारा और विरार खाड़ी से पूरी तरह से जोड़ा जाएगा।

पंपिंग स्टेशन और जलधारण तालाबों (Holding Ponds) का निर्माण

प्रस्ताव में इस बात की पुरज़ोर सिफारिश की गई है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से अतिरिक्त वर्षा जल को तुरंत निकालने के लिए नए समानांतर नालों का निर्माण किया जाए और विभिन्न स्थानीय जल निकायों को आपस में जोड़ा जाए। इसके अतिरिक्त, मूसलाधार बारिश के दौरान पानी के दबाव को नियंत्रित करने के लिए विशाल ‘जलधारण तालाबों’ (Holding Ponds) की स्थापना की जाएगी, जहाँ पानी को अस्थायी रूप से रोका जा सके। वहीं, समुद्री ज्वार के समय जब प्राकृतिक रूप से पानी की निकासी रुक जाती है, तब पानी को खींचकर बाहर फेंकने के लिए आधुनिक पंपिंग स्टेशन स्थापित करने का खाका भी खींचा गया है।

पूर्व महापौर राजीव पाटिल का बड़ा बयान:

“मैं इस शहर का नगराध्यक्ष और पहला महापौर रह चुका हूँ। मेरे कार्यकाल के दौरान भी विकास कार्यों में कुछ त्रुटियाँ या गलतियाँ हुई होंगी, जिसके लिए मैं खुद को भी नैतिक रूप से जिम्मेदार मानता हूँ। उस दौर में यह अनुमान लगाना कठिन था कि भविष्य में शहर में बाढ़ की स्थिति इतनी भयावह रूप ले लेगी।”

बुनियादी परियोजनाओं के अवरोधों को हटाने की मांग

इस मास्टर प्लान में वैतरणा और वसई नदी की तलहटी में जमा गाद (Silt) और रेत की नियमित व वैज्ञानिक सफाई करने पर ज़ोर दिया गया है। साथ ही, बुलेट ट्रेन और फ्रेट कॉरिडोर जैसी राष्ट्रीय स्तर की बड़ी आधारभूत परियोजनाओं के निर्माण के कारण जो प्राकृतिक जलमार्ग बाधित हुए हैं, उन्हें तत्काल बहाल करने और उन स्थानों पर आवश्यकतानुसार नए कल्वर्ट तथा पुलों का निर्माण करने की भी मांग की गई है। इस समन्वित योजना के क्रियान्वयन से लगभग 30 किलोमीटर लंबे वैतरणा-वसई खाड़ी जलमार्ग का भी भविष्य में वाणिज्यिक और पारिस्थितिक विकास संभव हो सकेगा।

50 वर्षों का विज़न और 95% सफलता का दावा

राजीव पाटिल ने स्पष्ट किया कि वह वसई-विरार की भौगोलिक स्थिति और जमीनी हकीकत से पूरी तरह वाकिफ हैं। इस महत्वाकांक्षी योजना को धरातल पर उतारने में 4 से 5 साल का समय लग सकता है और इस पर लगभग 4,000 से 5,000 करोड़ रुपये का अनुमानित बजट खर्च होगा। उन्होंने कहा कि हमें आने वाले 50 वर्षों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर ड्रेनेज सिस्टम का पुनर्गठन करना होगा। पाटिल ने पूरी ईमानदारी से कहा, “मैं यह दावा कभी नहीं करूँगा कि इसके बाद 100 प्रतिशत बाढ़ का खतरा टल जाएगा, लेकिन मुझे पूरा विश्वास है कि इससे 95 प्रतिशत तक समस्या का स्थायी समाधान निश्चित रूप से निकल जाएगा।”

इस कार्ययोजना को व्यावहारिक रूप से समझाने के लिए आज विशेषज्ञों द्वारा तैयार किया गया एक विस्तृत डेमोंस्ट्रेशन (प्रस्तुतिकरण) महानगरपालिका आयुक्त पृथ्वीराज बी.पी. के सामने प्रदर्शित किया जाएगा, ताकि इस योजना को जल्द से जल्द प्रशासनिक मंजूरी मिलकर धरातल पर काम शुरू हो सके।

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