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वसई-विरार में हर साल बाढ़ की स्थिति: जानिए पानी निकासी में क्यों आती है दिक्कत |

July 8, 2026 7:59 AM
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वसई-विरार में हर मानसून के दौरान जलभराव और बाढ़ की स्थिति एक गंभीर समस्या बन चुकी है। मुंबई से सटे इस शहर में लगातार हो रहे अनियोजित शहरीकरण, अवैध निर्माण और जल निकासी व्यवस्था की कमियों के कारण हर साल हालात बिगड़ते जा रहे हैं। भारी बारिश के बाद कई इलाकों में पानी कई दिनों तक भरा रहता है, जिससे आम जनजीवन पूरी तरह प्रभावित होता है।

भौगोलिक बनावट और ज्वार का असर

वसई-विरार का अधिकांश हिस्सा समुद्र तल से नीचे है। शहर के पश्चिम में अरब सागर और पूर्व में तुंगारेश्वर की पहाड़ियां हैं। पहाड़ियों से आने वाला बारिश का पानी समुद्र तक पहुंचने से पहले निचले इलाकों में जमा हो जाता है। यदि उसी समय समुद्र में ऊंची ज्वार आ जाए, तो पानी समुद्र में नहीं जा पाता और शहर में जलभराव की स्थिति बन जाती है।

अनियोजित विकास और प्राकृतिक भूमि का ह्रास

पिछले कुछ वर्षों में शहर की आबादी में तेजी से इजाफा हुआ है। पहले यहां बड़े पैमाने पर खेत, नमक के खेत और दलदली भूमि थी, जो बारिश का अतिरिक्त पानी सोख लेती थी। लेकिन इन क्षेत्रों में मिट्टी भरकर इमारतें और सड़कें बना दी गईं। इससे जमीन की पानी सोखने की क्षमता खत्म हो गई और पानी सीधे सड़कों पर जमा होने लगा।

नालों पर अतिक्रमण और कचरे की समस्या

पहले बारिश का पानी प्राकृतिक नालों और खाड़ियों के जरिए समुद्र तक पहुंच जाता था। लेकिन समय के साथ इन जलमार्गों पर अतिक्रमण और अवैध निर्माण के कारण उनका प्रवाह संकरा हो गया है। कई जगहों पर बड़े जलमार्गों की जगह छोटे सीमेंट पाइप डाल दिए गए हैं। इसके अलावा, नालों में प्लास्टिक और घरेलू कचरा फेंके जाने से बारिश के दौरान नाले जाम हो जाते हैं। नालों की सफाई के दौरान निकाला गया गाद भी किनारों पर पड़ा रहता है, जो पहली बारिश में फिर से नालों में बह जाता है।

रेलवे सेवाओं पर पड़ता है गहरा असर

जलभराव का सीधा असर पश्चिम रेलवे की सेवाओं पर पड़ता है। नालासोपारा और वसई रेलवे स्टेशन के आसपास ट्रैक पर पानी भर जाने से लोकल ट्रेन सेवाएं बाधित होती हैं। रेलवे की अतिरिक्त लाइनों के निर्माण के दौरान भी कुछ प्राकृतिक जल प्रवाह प्रभावित हुए हैं, जिससे ट्रैक पर पानी जमा होने की समस्या बढ़ी है।

स्थायी समाधान की है जरूरत

विशेषज्ञों के अनुसार, केवल नालों की सफाई से यह समस्या हल नहीं होगी। इसके लिए प्राकृतिक जलमार्गों को अतिक्रमण से मुक्त करना, जलभराव वाली जमीनों को संरक्षित रखना, आधुनिक ड्रेनेज प्रणाली विकसित करना और वर्षा जल प्रबंधन को मजबूत करना जरूरी है। रेलवे और स्थानीय प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय से ही इस समस्या का स्थायी समाधान निकल सकता है।

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