नालासोपारा: वसई-विरार शहर महानगरपालिका (VVCMC) मुख्यालय में आम नागरिकों और पत्रकारों के प्रवेश पर लगाई गई पाबंदी को लेकर राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है। मुख्यालय की तीसरी मंजिल पर स्थित आयुक्त, अतिरिक्त आयुक्त (उत्तर/दक्षिण) और स्थापना विभाग के कार्यालयों में नो-एंट्री के फैसले पर भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के जिला महामंत्री ब्रह्मदेव सिंह राजन ने कड़ा विरोध जताया है। भाजपा नेता ने इस फैसले को पूरी तरह लोकतंत्र विरोधी करार देते हुए सीधे प्रशासन की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं।
“25 लाख नागरिकों की संस्था अधिकारियों की जागीर नहीं”
ब्रह्मदेव सिंह राजन ने तीखा रुख अपनाते हुए कहा कि वसई-विरार महानगरपालिका क्षेत्र में 25 लाख से अधिक नागरिक रहते हैं। यह पूरी संस्था जनता के टैक्स के पैसों से चलती है। ऐसे में जनता को ही अपने हक के काम के लिए आयुक्त कार्यालय जाने से रोकना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और हैरान करने वाला है। उन्होंने सवाल उठाया, “क्या आयुक्त कार्यालय एक सार्वजनिक दफ्तर है या किसी की निजी संपत्ति? अगर अधिकारी जनता से मिलने को ही तैयार नहीं हैं, तो आम लोग अपनी शिकायतें लेकर कहां जाएं? पत्रकार जनता से जुड़े गंभीर मुद्दों को किसके सामने उठाएं?”
आयुक्त को सौंपा ज्ञापन, पूछे कई तीखे सवाल
भाजपा नेता ने इस तानाशाही रवैये के खिलाफ महापालिका आयुक्त को एक लिखित ज्ञापन सौंपा है, जिसमें प्रशासन से कई गंभीर सवाल पूछे गए हैं:
- तीसरी मंजिल पर आम लोगों और मीडिया की एंट्री बैन करने का यह फैसला किस कानून, शासन निर्णय (GR) या परिपत्र के आधार पर लिया गया है?
- क्या इस विवादित फैसले को आयुक्त की लिखित मंजूरी मिली है?
- यह तानाशाही निर्णय राज्य सरकार का है या फिर स्थानीय प्रशासन ने अपनी मर्जी से इसे लागू किया है?
- अगर इस संबंध में कोई लिखित आदेश नहीं है, तो नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकार किसके मौखिक निर्देश पर छीने जा रहे हैं? प्रशासन आखिर जनता से क्या छिपाना चाहता है?
राजन ने साफ तौर पर आरोप लगाया कि लोकतंत्र में जो प्रशासन जनता से दूरी बनाता है, वह कभी पारदर्शी नहीं हो सकता। इस फैसले ने महापालिका की कार्यप्रणाली को पूरी तरह संदेह के घेरे में ला खड़ा किया है। इस मामले को लेकर उन्होंने विपक्ष के नेता मनोज गोपाल पाटील को भी ज्ञापन की प्रति सौंपी है और इस मुद्दे को आगामी महासभा व जनहित के मंचों पर मजबूती से उठाने की मांग की है।
15 दिन का अल्टीमेटम, ‘महापालिका प्रवेश अधिकार आंदोलन’ की चेतावनी
भाजपा युवा मोर्चा ने महानगरपालिका प्रशासन को इस मनमाने फैसले को वापस लेने के लिए 15 दिनों का अल्टीमेटम दिया है। राजन ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि 15 दिनों के भीतर इस प्रतिबंध का कानूनी आधार सार्वजनिक नहीं किया गया और इसे तुरंत नहीं हटाया गया, तो भाजपा जनता को साथ लेकर उग्र “महापालिका प्रवेश अधिकार आंदोलन” शुरू करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनता की आवाज दबाने की हर कोशिश का लोकतांत्रिक तरीके से मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।
प्रशासन का पक्ष: इस पूरे विवाद पर महानगरपालिका का रुख जानने के लिए स्थापना विभाग की उपायुक्त स्वाति देशपांडे से फोन के जरिए संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनकी तरफ से कॉल का कोई जवाब नहीं मिला। इसके चलते इस संवेदनशील मुद्दे पर प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आ सकी है।






