वसई-विरार: वसई-विरार शहर महानगरपालिका क्षेत्र में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (घनकचरा संकलन) और सड़कों की सफाई के लिए निकाले गए करीब 957 करोड़ रुपये के टेंडर को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने इस पूरी निविदा प्रक्रिया पर गंभीर धांधली और नियमों की अनदेखी के आरोप लगाए हैं। पार्टी के पालघर जिलाप्रमुख प्रथमेश राऊत के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने मनपा आयुक्त व प्रशासक और पूर्व विरोधी पक्ष नेता मनोज पाटिल को ज्ञापन सौंपकर इस टेंडर को तुरंत रद्द करने की मांग की है।
आचार संहिता से ठीक पहले टेंडर प्रक्रिया पूरी करने पर संदेह
प्रथमेश राऊत ने टेंडर प्रक्रिया की समयसीमा पर सवाल उठाते हुए इसे अत्यधिक जल्दबाजी में लिया गया फैसला करार दिया है। उनके अनुसार, आगामी 5 वर्षों के लिए जारी इस निविदा को 25 सितंबर को प्रशासनिक मंजूरी मिली थी और उसके अगले ही दिन 26 सितंबर को टेंडर जारी कर दिया गया।
तकनीकी सलाहकार की रिपोर्ट आने के बाद 10 दिसंबर को बातचीत का पत्र भेजा गया, 11 दिसंबर को ठेकेदार का जवाब आया और 12 दिसंबर को इसे मंजूरी भी दे दी गई। इसके बाद 15 दिसंबर को चुनाव आचार संहिता लागू होने से महज कुछ घंटे पहले स्वीकृति पत्र (Letter of Acceptance) जारी कर दिया गया। शिवसेना (UBT) का दावा है कि जिस प्रकार से कागजी कार्रवाई निपटाई गई, वह प्रक्रिया की निष्पक्षता पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा करती है।
कर्मचारियों और वाहनों की कटौती से सफाई व्यवस्था ठप
शिकायत पत्र में वसई-विरार शहर की बदहाल सफाई व्यवस्था को लेकर भी आंकड़े सामने रखे गए हैं। मनपा के 9 प्रभाग समितियों और 20 जोन के अंतर्गत:
- कर्मचारियों की आवश्यकता: सड़क सफाई के लिए 1,257 कर्मचारी और कचरा उठाने के लिए 1,379 कर्मचारी।
- वाहनों की आवश्यकता: कचरा परिवहन के लिए 65 कॉम्पैक्टर और 120 टिपर वाहन।
आरोप है कि ठेकेदारों ने अपना मुनाफा बढ़ाने और लागत घटाने के उद्देश्य से आवश्यक कर्मचारियों की संख्या और वाहनों के बेड़े में भारी कटौती कर दी है। नतीजतन, शहर के कई इलाकों में कचरे के अंबार लगे हुए हैं और डोर-टू-डोर कचरा संकलन प्रणाली पूरी तरह चरमरा गई है।
पारदर्शी प्रक्रिया न होने पर तीव्र जनआंदोलन की चेतावनी
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने मांग की है कि इस पूरे मामले की किसी स्वतंत्र एजेंसी से गहन जांच कराई जाए, वर्तमान टेंडर को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए और आगामी महासभा में नया प्रस्ताव लाकर पूरी तरह पारदर्शी तरीके से दोबारा निविदा निकाली जाए। पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि मनपा प्रशासन ने इन मांगों पर शीघ्र संज्ञान नहीं लिया, तो वसई-विरार की जनता के हित में उग्र आंदोलन छेड़ा जाएगा।
इस दौरान प्रतिनिधिमंडल में मुख्य रूप से प्रवीण महाप्रलकर, किरण चेंदवेंकर, अभिजीत सांगले, रोहण चव्हाण, जयेश राउत, विवेक पवार, सुरेंद्र सिंह राज, मंगेश चव्हाण, उदय जाधव समेत कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित थे।








