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वसई-विरार में पानी के बढ़े बिलों और नए टैक्स पर घमासान, 17 जुलाई की महासभा में विपक्ष घेरेगा प्रशासन |

July 16, 2026 4:28 AM
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विरार: वसई-विरार शहर महानगरपालिका (VVCMC) द्वारा पानी के बिलों में की गई अप्रत्याशित बढ़ोतरी और थोपे गए नए करों (Taxes) के खिलाफ विपक्ष ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इस संवेदनशील मुद्दे को लेकर आगामी 17 जुलाई को होने वाली महानगरपालिका की महासभा में भारी हंगामे के आसार हैं। नागरिकों के बढ़ते आक्रोश को देखते हुए विपक्ष ने इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा की मांग की है और महासभा की आधिकारिक कार्यसूची में बढ़े हुए पानी के बिलों को तत्काल रद्द करने का प्रस्ताव भी शामिल करवा लिया है।

पानी के बिल हुए लगभग दोगुने, जनता पर पड़ा भारी आर्थिक बोझ

विपक्षी पार्षदों का आरोप है कि प्रशासन द्वारा अप्रैल 2026 से मार्च 2027 की अवधि के लिए जारी किए गए पानी के बिल पिछले साल की तुलना में लगभग दोगुने होकर आ रहे हैं। इस अचानक हुई बढ़ोतरी से आम नागरिकों की जेब पर भारी अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा है। विपक्ष का कहना है कि इस तानाशाही फैसले से पूरे शहर में तीव्र असंतोष है और स्थानीय नागरिक लगातार बढ़े हुए बिलों को वापस लेने की गुहार लगा रहे हैं।

आश्वासन के बाद भी लागू किए ‘जल’ और ‘मलप्रवाह’ लाभकर

इस जनविरोधी नीति के खिलाफ विपक्ष की ओर से प्रज्ञा पाटिल ने आधिकारिक प्रस्ताव रखा है, जिसे गटनेता अशोक शेळके का पुरजोर समर्थन मिला है। इससे पहले, विपक्ष के नेता मनोज पाटिल ने भी मनपा आयुक्त को एक सख्त पत्र लिखकर “जल आपूर्ति लाभकर” (Water Supply Benefit Tax) और “मलप्रवाह सुविधा लाभकर” (Sewerage Benefit Tax) को तुरंत प्रभाव से रद्द करने की मांग की थी।

मनोज पाटिल ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि बजट और पिछली महासभाओं में यह साफ आश्वासन दिया गया था कि जनता पर कोई नया टैक्स नहीं लादा जाएगा। इसके बावजूद प्रशासन ने चोर दरवाजे से दरों में वृद्धि कर दी।

विपक्ष का तीखा सवाल: “जब वसई-विरार के कई इलाकों में आज भी नागरिकों को नियमित पीने का पानी और बेहतर सीवरेज (गंदे पानी के निकास) की बुनियादी सुविधाएं तक नसीब नहीं हैं, तो ऐसे में जनता से अतिरिक्त कर वसूलना पूरी तरह से अनुचित और अन्यायपूर्ण है।”

अब पूरे वसई-विरार शहर की नजरें 17 जुलाई को होने वाली इस अहम महासभा पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि प्रशासन जनभावनाओं का सम्मान करते हुए कदम पीछे खींचता है या टैक्स का बोझ बरकरार रहता है।

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