विरार: विरार पूर्व में रेलवे लाइन से सटे सिडको (CIDCO) द्वारा आरक्षित ‘वाटर होल्डिंग एरिया’ (Water Holding Area) पर कथित अवैध निर्माण को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता शिवप्रताप सिंह सोमवंशी ने वसई-विरार महानगरपालिका (VVMC) आयुक्त को ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने इस मामले में तत्काल और कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
आरक्षित भूमि पर व्यावसायिक कब्जा
ज्ञापन के अनुसार, सिडको के विकास आराखड़े में इस क्षेत्र को वर्षा जल के प्राकृतिक संचयन और निकासी के लिए विशेष रूप से आरक्षित किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य भारी बारिश के दौरान जलभराव और बाढ़ जैसी स्थितियों से बचाव करना था। हालांकि, आरोप है कि इस आरक्षित भूमि पर मिट्टी भरकर मैरेज हॉल, मॉल और अन्य व्यावसायिक इमारतें खड़ी कर दी गई हैं, जिससे बारिश के पानी का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हुआ है।
जलभराव से बढ़ रहे स्थानीय जोखिम
शिकायत में बताया गया है कि जल निकासी की व्यवस्था प्रभावित होने के कारण हर साल आसपास के इलाकों में जलभराव की समस्या गंभीर रूप ले लेती है। कई आवासीय इमारतों में पानी घुसने से स्थानीय नागरिकों को आर्थिक नुकसान, स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों और सुरक्षा जोखिमों का सामना करना पड़ रहा है।
निष्पक्ष जांच और कानूनी कार्रवाई की अपील
सामाजिक कार्यकर्ता ने महानगरपालिका से मांग की है कि संबंधित क्षेत्र का संयुक्त निरीक्षण कराया जाए। साथ ही, महाराष्ट्र प्रादेशिक एवं नगररचना अधिनियम (MRTP Act) और अन्य लागू कानूनों के तहत अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई कर वाटर होल्डिंग एरिया को उसके मूल स्वरूप में बहाल किया जाए।
दोषियों के खिलाफ हो सख्त कार्रवाई
ज्ञापन में यह भी स्पष्ट मांग की गई है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो। जांच के दौरान यदि किसी अधिकारी या व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है, तो उनके खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह के अतिक्रमण को रोका जा सके। फिलहाल, इस मामले में महानगरपालिका की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है और जांच की प्रक्रिया प्रारंभ होने की प्रतीक्षा है।





