वसई:
वसई-विरार शहर की मुख्य सड़कों से लेकर आंतरिक गलियों तक, बिना किसी मानक के बनाए गए स्पीड ब्रेकर अब आम जनता के लिए सिरदर्द बन चुके हैं। यातायात को नियंत्रित करने और हादसों को रोकने के उद्देश्य से बनाए जाने वाले ये स्पीड ब्रेकर अब खुद ही दुर्घटनाओं का बड़ा कारण बन रहे हैं। मानकों की सरेआम अनदेखी और एक ही सड़क पर लगातार 3-4 अत्यधिक ऊंचे ब्रेकर होने से वाहन चालकों में भारी रोष है।
नियमों की उड़ाई जा रही धज्जियां
नियमानुसार, किसी भी स्पीड ब्रेकर का निर्माण इंडियन रोड कांग्रेस (IRC) द्वारा निर्धारित मानकों के तहत ही होना चाहिए:
- मानक ऊंचाई: लगभग 10 सेंटीमीटर
- मानक चौड़ाई: 3.7 मीटर
- चेतावनी संकेतक: स्पीड ब्रेकर से कम से कम 40 मीटर पहले स्पष्ट सूचना बोर्ड होना अनिवार्य है।
लेकिन वसई-विरार में स्थिति इसके ठीक उलट है। यहाँ बिना अनुमति के मोड़, संकरी गलियों, चौराहों और जोड़ सड़कों पर ऊंचे-ऊंचे ब्रेकर बना दिए गए हैं, जिससे दोपहिया और तीनपहिया वाहनों का संतुलन बिगड़ने और दुर्घटना होने का जोखिम लगातार बना रहता है।
बदहाल सड़कें और मनमाने ब्रेकर: जनता बेहाल
“सड़कों पर पहले से ही गड्ढों और पैचवर्क की भरमार है। उस पर से ये अनधिकृत और अत्यधिक ऊंचे स्पीड ब्रेकर कमरतोड़ साबित हो रहे हैं।”
— प्रतीक नाईक (स्थानीय निवासी, वसई)
ग्रामीण क्षेत्रों में युवाओं की तेज़ रफ़्तार और हुड़दंग पर लगाम लगाने के नाम पर स्थानीय स्तर पर मनमाने ढंग से ब्रेकर बना दिए गए हैं।
महापालिका के ठेकेदारों पर भी उठे सवाल
हाल ही में वसई-विरार महानगरपालिका द्वारा कराए गए डामरीकरण और मरम्मत कार्य के दौरान ठेकेदारों ने भी तकनीकी नियमों की जमकर अनदेखी की। आरोप है कि टूटे ब्रेकरों को दोबारा बनाते समय ठेकेदारों ने अपनी मर्ज़ी से ऊंचे और खतरनाक ब्रेकर खड़े कर दिए।
महापालिका की सफाई और आश्वासन
मामला गरमाने के बाद महानगरपालिका के निर्माण विभाग ने संज्ञान लिया है। प्रशासन का कहना है कि शहर में बनाए गए सभी अनधिकृत और नियमों के विपरीत बने स्पीड ब्रेकरों की सूची तैयार की जाएगी और जल्द ही इन्हें हटाने की सख्त कार्रवाई की जाएगी।











