वसई-विरार महानगरपालिका क्षेत्र में प्रस्तावित करवृद्धि, बदहाल सड़कों और नागरिक समस्याओं को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। रविवार, 16 अगस्त को मनपा मुख्यालय पर एक विशाल ‘जनआक्रोश मोर्चा’ निकाला गया। इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व विपक्ष के नेता मनोज गोपाल पाटील और भाजपा जिलाध्यक्ष प्रज्ञा क. पाटील ने संयुक्त रूप से किया। विरार पश्चिम स्थित जकात नाका से शुरू हुए इस मोर्चे में स्थानीय नागरिकों, महिलाओं और पार्टी कार्यकर्ताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
पानीपट्टी में 100% और घरपट्टी में बढ़ोतरी का आरोप मोर्चे के दौरान भाजपा नेताओं ने महानगरपालिका प्रशासन और सत्ताधारी बहुजन विकास आघाड़ी पर जमकर निशाना साधा। प्रदर्शन में सांसद डॉ. हेमंत सावरा, विधायक राजन नाईक, गुटनेता अशोक शेळके, सुदेश चौधरी, महेंद्र पाटील और 43 नगरसेवक शामिल हुए। नेताओं का आरोप है कि अप्रैल 2026 से पानी के बिलों (पानीपट्टी) में 100 प्रतिशत तक की भारी वृद्धि कर दी गई है, जबकि इसके बावजूद जनता को नियमित और स्वच्छ पेयजल नहीं मिल रहा है। इसके साथ ही विभिन्न करों के नाम पर घरपट्टी में भी 20 से 25 प्रतिशत तक का अतिरिक्त वित्तीय बोझ डाला गया है।
सड़क मरम्मत, आवारा कुत्तों और अवैध निर्माण पर उठाए सवाल प्रदर्शनकारियों ने महानगरपालिका क्षेत्र की जर्जर सड़कों और मरम्मत कार्यों पर हुए भारी-भरकम खर्च की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए। भाजपा ने सड़कों की मरम्मत के लिए स्वीकृत लगभग 45 करोड़ रुपये के अतिरिक्त फंड और कार्यों की गुणवत्ता की जांच के लिए किसी निष्पक्ष ‘थर्ड पार्टी तकनीकी ऑडिट’ कराने की मांग की। इसके अलावा, आवारा कुत्तों की नसबंदी और रेबीज टीकाकरण अभियान में कथित धांधली की जांच तथा पेल्हार समेत कई इलाकों में तेजी से बढ़ रहे अनधिकृत निर्माणों के खिलाफ सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की मांग की गई।
श्वेतपत्र जारी करने की चुनौती और तीव्र आंदोलन की चेतावनी भाजपा ने मनपा के प्रशासनिक कार्यकाल में हुए सभी विकास कार्यों और वित्तीय लेन-देन का विशेष ऑडिट करवाकर ‘श्वेतपत्र’ जारी करने की खुली चुनौती दी। आंदोलन के अंत में मनपा आयुक्त को एक विस्तृत मांग पत्र (ज्ञापन) सौंपा गया। इसमें करवृद्धि तुरंत वापस लेने, सड़क कार्यों का निष्पक्ष ऑडिट कराने और अनधिकृत निर्माणों पर बुलडोजर कार्रवाई करने की मांग शामिल है। पार्टी नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि जनहित से जुड़ी इन मांगों को शीघ्र पूरा नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में महानगरपालिका का कामकाज ठप कर इससे भी अधिक तीव्र आंदोलन छेड़ा जाएगा।











