वसई-विरार (मुंबई): वसई-विरार शहर में बिना किसी पूर्व सूचना के बार-बार और कई-कई घंटों तक बिजली कटौती होने के कारण स्थानीय नागरिकों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। लगातार हो रही बिजली कटौती, स्मार्ट मीटर की समस्या, अत्यधिक बिजली बिलों और उपभोक्ताओं की शिकायतों का समय पर निपटारा न होने के कारण अब राजनीतिक पारा भी चढ़ गया है। भाजपा वसई-विरार जिला महामंत्री मनोज बारोट ने महावितरण (MSEDCL) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है।
‘सत्ता में होने का मतलब चुप बैठना नहीं’ मनोज बारोट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यद्यपि राज्य में भाजपा सत्ता में है, लेकिन इसका अर्थ यह बिल्कुल नहीं है कि पार्टी आम जनता की समस्याओं पर आंखें मूंद ले। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक कमियों और लापरवाही को उजागर कर नागरिकों को न्याय दिलाना भाजपा की नैतिक जिम्मेदारी है। बारोट ने मांग की है कि महावितरण को वसई-विरार के प्रत्येक विभाग में तत्काल ‘शिकायत निवारण शिविर’ आयोजित करने चाहिए, ताकि बिजली बिल, स्मार्ट मीटर और निर्बाध बिजली आपूर्ति से जुड़ी समस्याओं का मौके पर ही समाधान हो सके।
अनियोजित शहरीकरण और अवैध निर्माण पर उठाए सवाल बिजली संकट के लिए केवल महावितरण को ही नहीं, बल्कि अनियोजित शहरीकरण को भी जिम्मेदार ठहराते हुए बारोट ने कहा कि वसई-विरार में तेजी से हो रहे निर्माण कार्यों के कारण बिजली बुनियादी ढांचे पर अतिरिक्त भार पड़ रहा है। उन्होंने वसई-विरार महानगरपालिका के नियोजन (Urban Planning) पर तीखे सवाल खड़े किए। उन्होंने मांग की कि शहर में अवैध निर्माणों पर तुरंत रोक लगाई जाए और संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई तय की जाए, ताकि वसंत नगरी जैसी स्थितियां दोबारा न बनें।
प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष 16 अगस्त को भाजपा द्वारा आयोजित ‘जनआक्रोश मोर्चा’ का जिक्र करते हुए मनोज बारोट ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार विकास कार्यों के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध करा रही हैं। हालांकि, यदि स्थानीय प्रशासनिक लापरवाही या भ्रष्टाचार के कारण इसका लाभ जनता तक नहीं पहुंच पाता है, तो भाजपा चुप नहीं रहेगी। उन्होंने साफ किया, “हमारा संघर्ष किसी सरकार के खिलाफ नहीं, बल्कि जनसमस्याओं की अनदेखी करने वाली व्यवस्था और टालमटोल रवैये के खिलाफ है।”
बड़ा आंदोलन करने की चेतावनी भाजपा नेता ने अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि महावितरण और स्थानीय प्रशासन ने स्मार्ट मीटर, बढ़े हुए बिलों और बिजली कटौती जैसी नागरिक समस्याओं का तुरंत समाधान नहीं किया, तो भाजपा जनता को साथ लेकर सड़कों पर उतरेगी और लोकतांत्रिक तरीके से तीव्र आंदोलन करेगी।











